नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

06 September, 2011

खिल -खिल जाये ..सकल भुवन अपार .....!!

खिल-खिल    जाये ..सकल भुवन अपार .....!!


    इन रंगों को देख कर जब कुछ लिखना चाहा....गहन सोच में डूब  गया मन .....बरबस यही सोचने लगी..इन  रंगों  का  उद्गम  क्या  है  ...?इतने  खूबसूरत  रंग  आये  कहाँ  से  हैं  ...?
  स्वयं से प्रश्न तो स्वयं से ही उत्तर ..
.....अपनी  माँ ..धरा ..जो हमें धारण करती है ...हमारा पालन करती.....ये रंग उसी के तो हैं ...तब 
कुछ इस तरह बह निकले मेरे शब्द...

.





  painting by Pragya Singh.

रंग रेज हो...तुम प्रभु ...
सकल भुवन के ...
साहिब मेरे ....!!
कृपा दृष्टि अबके ऐसी दो...
जीवन में बस ऐसे रंग हों....!
हर्ष हो गीत हो नहीं बैर हो...!!
बहती धारा रंगों के संग ..
भीगा-भीगा हो..निखरा हो..
 सप्त  सुरों का गहरा ये रंग... 
और बिखरा हो खिलाता सा  ..
 सृजित ..जीवित ..प्रस्फुटित .. 
प्रत्येक सृजन ..!!



रंगरेज हो ..तुम प्रभु ..
सकल भुवन के...
साहिब मेरे...
ऐसे कुशल चितेरे ....!!

कीजे  किरपा ..
निजजन पर ..
नीलगगन से नील श्याम रंग ...
 नीलकंठ की जटा  से  ये  गंग .. 
नील धरा की पावस धारा...!!
 धन-धन गाए मन मतवारा ..!!
सिंचित....मेरा-सबका ये मन...
अमृत बरसे घर- घर-आँगन...!

पीत सी प्रीत चटख   खिले  ऐसी ..
 हो जाए ..नव-पल्लवी  सा. ....
निश्छल  कोमल....
खिला-.खिला ..हरित मन..!!

मन में शुभ रंगों की...
ऐसी हो बहार...
बरसे रस   फुहार ...
पृथ्वी  सा  रूप  सँवार...
खिल- खिल  जाये ..सकल भुवन अपार .....!!






संगीत के विषय में जानना चाहें  तो पधारें यहाँ ...मेरा नया ब्लॉग ...
http://swarojsurmandir.blogspot.com/(स्वरोज सुर  मंदिर )

27 comments:

  1. मन में शुभ रंगों की...
    ऐसी हो बहार...
    बरसे रस फुहार ...
    पृथ्वी सा रूप सँवार...सुन्दर पंक्तिया...

    ReplyDelete
  2. bahut sundar abivyakti
    man rang gaya

    ReplyDelete
  3. तरह तरह के रंग बिखरे हैं,
    चटख लाल, कुछ चटख हरे हैं।

    ReplyDelete
  4. पीत सी प्रीत चटक खिले ऐसी ..
    हो जाए ..नव-पल्लवी सा. ....
    निश्छल कोमल....
    खिला-.खिला ..हरित मन..!!

    बहुत ही सुंदर ...

    ReplyDelete
  5. बहुत ही प्यारा और मन को भाने वाल गीत।

    सादर

    ReplyDelete
  6. बहुत सुंदर शब्दों में लिखा शानदार गीत मन को छु गया /बहुत बधाई आपको /

    ReplyDelete
  7. सुन्दर प्रार्थना ... सारे रंग मिल कर मन में इन्द्रधनुष बना दें ..

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

    ReplyDelete
  9. मन में शुभ रंगों की...
    ऐसी हो बहार...
    बरसे रस फुहार ...
    पृथ्वी सा रूप सँवार...
    खिल- खिल जाये ..सकल भुवन अपार .....!!

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति अनुपमा जी बधाई


    ''

    ReplyDelete
  10. नीलगगन से नील श्याम रंग ...
    नीलकंठ की जटा से ये गंग ..
    नील धरा की पावस धारा...!!
    धन-धन गाए मन मतवारा ..!!
    सिंचित....मेरा-सबका ये मन...
    अमृत बरसे घर- घर-आँगन...!
    indradhanushi rang her taraf bikhar jaye

    ReplyDelete
  11. अपने रंगों से आपने भादों में फागुन का समां बांध दिया है... बहुत सुंदर प्रार्थना...खिल खिल जाये सकल भवन अपार...शुभकामनायें!

    ReplyDelete
  12. ...ऐसी रंग दे कि रंग नाहि छूटे ...बहुत ही सुंदर रचना ...शुभकामनाएँ ।

    ReplyDelete
  13. बहुत रंग -बिरंगी ..., खिल खिल जाये ...सकल भुवन अपार

    ReplyDelete
  14. कृपा दृष्टि अबके ऐसी दो...
    जीवन में बस ऐसे रंग हों....!

    kyaa baat hai ....!!

    ReplyDelete
  15. रचना और उसका प्रस्तुतीकरण...दोनों...लाजवाब...बधाई स्वीकारें.

    नीरज '

    ReplyDelete
  16. रंगों का अनुपम समावेश....
    सुन्दर प्रार्थना!

    ReplyDelete
  17. सभी भावो के रंगो में डूबी मनभावन स्तुति....

    ReplyDelete
  18. बहुत सुंदर भावमयी अभिव्यक्ति...

    ReplyDelete
  19. इस रचना का रंग मनभावन है।

    ReplyDelete
  20. मन पावन शीतल हो गया आपकी यह रचना पढ़...

    साधुवाद इस पुनीत कामना के लिए...ईश्वर यह सत्य करें...ईश्वर सबके मन में ऐसे ही पावन भाव भरें...

    ReplyDelete
  21. rangoin main hi rang ghul gaye !!!! inderdhanush ki hi tarah jeevan main rango ka samagan ki adbhut abhivyakti !!!!! bahut hi sunder !!!!!!

    ReplyDelete
  22. रंगों से सराबोर ये पोस्ट आपके नाम की तरह ही अनुपम है|

    वक़्त मिले तो हमारे ब्लॉग पर भी आयें|

    ReplyDelete
  23. नीलगगन से नील श्याम रंग ...
    नीलकंठ की जटा से ये गंग ..

    बहुत सुन्दर... भावमयी प्रार्थना....
    सादर...

    ReplyDelete
  24. ज़िन्दगी के भी कई रंग हैं.

    ReplyDelete
  25. हर तरफ रंग बिखरा पड़ा है इस कविता में . मनमोहक .

    ReplyDelete
  26. रंग रेज हो...तुम प्रभु ...
    सकल भुवन के ...
    साहिब मेरे ....!!
    कृपा दृष्टि अबके ऐसी दो...
    जीवन में बस ऐसे रंग हों...
    अपनी तूलिका से उनको मैं एक रूप दे सकूं..

    अब अपनी हर पेंटिंग को आरंभ करने से पहले शायद अब भगवान से यही प्रार्थना करेंगे....

    बहुत ही मनभावन कविता है ....

    एक सखी की कलम और दूजी की तूलिका...
    दोनों मिलकर बनाएँ अपने मन के इन्द्रधनुष...
    और खिल खिल जाये ..सकल भुवन अपार....

    thanx for making my painting more meaningful.....

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!