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24 September, 2011

सूरज साथ है मेरे .....!!

उड़ान ...!!
 कहते हैं अब रात हो गयी ...
अन्धकार छा गया ...
किन्तु रात के  इस अन्धकार में भी ...
मेरी  यात्रा  तो  जारी  है...
मैं पंछी बन उड़ चली हूँ ....
दूर देस.....
पूनम के चाँद को खिलते हुए ...
देख रही  हूँ .... सोच रही हूँ .... 

दिव्य ऊष्मा  का  दिव्य  रूप ...
सूरज  साथ  है  मेरे ...
पहुँचाता है किरणे अपनी मुझ तक....
तुम साथ हो मेरे .....!!
रात्रि के सर्वत्र व्याप्त तम   में  भी  ....
जैसे  रूप  बदल कर  ...!

इस चांदनी में ...
महसूस होता  है मुझे ....
स्निग्ध   सा..
बरसता ...मुझ  पर ...
शांत  ...शीतल  ...निर्विकार......
मन के पोर-पोर तक रिसता हुआ ...
अपार  ठंडक  देता   हुआ  ...
सूरज  साथ  है  मेरे ....!!!!!

42 comments:

  1. waah virodhabhaas liye hue kavita bahut sundar

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  3. शीतलता मेरी, प्रकाश उसका।

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  4. जब सूरज साथ हो तो किसी कालिमा का खतरा नहीं होता।

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  5. खूबसूरत भाव ..चांदनी में भी सूरज साथ है ..अश का संचार करती रचना

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  6. बहुत सुंदर ...आखिर चाँद को रोशनी भी सूरज ही देता है ...

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  7. सूरज की किरणें, चांदनी की शीतलता...
    वाह, कलपना के नए आयाम।
    अच्छी कविता।

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  8. अपार ठंडक देता हुआ ...
    सचमुच....
    खुबसूरत भावाभिव्यक्ति....
    सादर...

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  9. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा दिनांक 26-09-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  10. बहुत ही खूबसूरत भावाभिव्यक्ति...

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  11. खूबसूरत भाव ..चांदनी में भी सूरज साथ है .सुन्दर...

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  12. बहुत सुन्दर , सार्थक रचना , सार्थक तथा प्रभावी भावाभिव्यक्ति , ब धाई

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  13. प्रस्तुति स्तुतनीय है, भावों को परनाम |
    मातु शारदे की कृपा, बनी रहे अविराम ||

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  14. बेह्द खूबसूरत भावो का समन्वय्।

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  15. चांदनी की शीतलता पर इतना विश्वास !! सुंदर अतिसुन्दर ...

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  16. बहुत सुन्दर ...मन खुश हो गया

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  17. कई बार भाव इतने प्रभावी होते है की उन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता . आज यूँ ही .

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  18. बहुत अच्छा। मै पंछी बन उड चली हूँ।

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  19. जितनी प्यारी कविता उतना सुंदर चित्र।

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  20. अपार ठंडक देता हुआ ...
    सूरज साथ है मेरे ....!!!!!

    बहुत सुंदर रचना बहुत संवेदनशील. बधाई.

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  21. भरोसा बनाएं रखें ...
    शुभकामनायें !

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  22. दिव्य ऊष्मा का दिव्य रूप ...
    सूरज साथ है मेरे ...
    पहुँचाता है किरणे अपनी मुझ तक....
    रात्रि के सर्वत्र व्याप्त तम में भी ....aur hamesha rahega

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  23. बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! बधाई!

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  24. जिस क्षण चाँद भी सूरज बन जाता है वह क्षण इबादत का ही हो सकता है... सुंदर अभिव्यक्ति !

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  25. इस चांदनी में ...
    महसूस होता है मुझे ....
    स्निग्ध चांदनी सा..
    बरसता ...मुझ पर ...
    शांत ...शीतल ...निर्विकार......
    मन के पोर-पोर तक रिसता हुआ ...
    बहुत खूब!

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  26. बहुत ही सुन्दर पोस्ट........तस्वीरे चार चाँद लगा रही हैं पोस्ट में|

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  27. बहुत खूब लिखा आपने
    मेरे ब्लॉग पर भी आइये
    http://iamhereonlyforu.blogspot.com/

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  28. एक बार फिर आपके शब्द कौशल ने मन्त्र मुग्ध कर दिया...नमन है आपकी लेखनी को...अद्भुत

    नीरज

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  29. अत्यंत सुन्दर....अपने सूरज (प्रियतम) की निकटता से प्राप्त होने वाली सम्मोहक गर्माहट चाँद और चांदनी के माध्यम से बहुत ही सुन्दर ढंग से व्यक्त किया गया है.

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  30. Anupama bahut hi sunder post hain.It is reflecting your inner heart showing you are happy and satisfied.All my best wishes to you.

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  31. क्या बात.... सुंदर बिम्ब ,गहरे भाव....

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  32. आज आपकी पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (१२) के मंच पर प्रस्तुत की गई है /कृपया आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप इसी तरह मेहनत और लगन से हिंदी की सेवा करते रहें यही कमना है /आपका ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर आपका स्वागत है /जरुर पधारें /

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  33. बहुत प्रभावी भावाभिव्यक्ति..

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!