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10 September, 2011

पद्मजया ... ही ...बनूँ.......!!

पद्मकली
प्रभु प्रदत्त ...
लालित्य से भरा ये रूप....
बंद कली में मन ईश स्वरुप... 
खुलतीं हैं  धीरे-धीरे ..
मन की बंद परतें...
जैसे पद्मश्री की पंखुड़ी ...
बिखेरतीं हैं इस जग में ...
अरुण कमल .
अपने होने की शुभ आभ ...!!
 और  देती  है  शुभ-लाभ ...!!
या  बिखेरता है ..
लालिमा अरुणाभ ..
जग  आलोकित  करता  हुआ... 
मन प्रकाशित करता हुआ...!!

लेतीं हूँ तुम से  प्रेरणा  पद्मकली....
खुलती  जाएँ ज्यों -ज्यों ...
मेरे मन की परतें ....
हे  पद्मा  .. पद्मश्री ...
मैं  पद्मप्रिया  ...
तुम्हें पाकर....तुम्हें निहारकर ...
तुम्हें स्पर्श कर ...
पद्मजया ....पद्मजया ... ही ...बनूँ.......!!

                                                         संगीत के विषय में जानना चाहें  तो पधारें यहाँ ......सुरों  का  तसव्वुर ...
                                                                      swaroj sur mandir (स्वरोज  सुर  मंदिर )

Lotuses are symbols of purity  and hence symbolize divine birth. 
According to the Lalitavistara, 'the spirit of the best of men is spotless, like the new lotus in the [muddy] water which does not adhere to it', and, according to esoteric Buddhism, the heart of the beings is like an unopened lotus: when the virtues of the Buddha develop therein the lotus blossoms.

39 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना है।
    एक बात और..कई शब्द मैने पहली बार इस्तेमाल होते हुए देखा है।

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  2. अपने होने की शुभ आभ ...!!
    और देती है शुभ-लाभ ...!!
    या बिखेरता है ..
    लालिमा अरुणाभ ..
    जग आलोकित करता हुआ...
    मन प्रकाशित करता हुआ...!!

    बेहद खूबसूरत कविता।

    सादर

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  3. लेतीं हूँ तुम से प्रेरणा पद्मकली....
    खुलती जाएँ ज्यों -ज्यों ...
    मेरे मन की परतें ....
    मैं पद्मप्रिया ...
    तुम्हें पाकर....तुम्हें निहारकर ...
    तुम्हें स्पर्श कर ...
    पद्मजया ....पद्मजया ... ही ...बनूँ.....उत्कृष्ट भावों के संग उत्कृष्ट चाह

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  4. सुन्दर भावपूर्ण और खूबसूरत अभिव्यक्ति....

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  5. क्या ग़जब की रचना
    सभी पंक्तियाँ विचारणीय भाव संजोये हैं..... बहुत बढ़िया

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  6. अति सुंदर भाव और अति सुंदर शब्दों से पिरोई आकांक्षा ! बहुत बहुत बधाई!

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  7. खूबसूरत भावों का खूबसूरत प्रदर्शन...

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  8. लेतीं हूँ तुम से प्रेरणा पद्मकली....
    खुलती जाएँ ज्यों -ज्यों ...
    मेरे मन की परतें ....

    आपको बहुत बहुत बधाई --
    इस जबरदस्त प्रस्तुति पर ||

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  9. bhaut hi khubsurat bhaavo se rachi rachna...

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  10. kya baat hai bahut hi shaandaar shabdon main likhi anupam rachanaa,aap itane katin shabd upyog main laatin hain ki aadhon ka arth to hamain samajh hi nahi aata hai .badhaai aapko itani bemisaal rachanaa ke liye.

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  11. प्रभावी रचना , बेहतर प्रस्तुति , बधाई

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  12. कमल का फूल मुझे बहुत प्रभावित करता है ...मेरी दादी का नाम पद्मा और माँ का नाम सरोज था
    ...वही बात कई दिनों से मन में घूम रही थी ...अपने आप को कैसे उनसे जोडू ...?बहुत सोचा ...शायद ...कुछ टूटे से भाव हैं या कविता बनी है ...पता नहीं .....
    सच तो यह है की मुझे दादी और माँ से ज्यादा दिव्य कुछ लगता ही नहीं ...कमल में भी मुझे वही दिव्यता दिखती है ....

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  13. प्रकृति के सौन्दर्य का अग्रप्रतीक।

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  14. Very touching... very nice meaningful creation...

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  15. सुंदर....अद्भुत शाब्दिक चित्रण किया अनुपमाजी.....

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  16. अनुपमा त्रिपाठी जी,
    नमस्कार,
    आपके ब्लॉग को "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगसपाट डाट काम" के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

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  17. बेहद सुन्दर शब्दों का ताना बाना.

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  18. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  19. कमल की शोभा जब खुद के नाम से भी जुड़ जाए तो ऐसी खूबसूरत कवितायेँ बन जाती हैं ...
    अतिसुन्दर !

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  20. कमाल के भाव, शब्द सौन्दर्य और उत्कृष्ट अभिव्यक्ति . आभार .

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  21. Abhilasha ythasheeghra purn ho . hamaari yhi shubhkamna hai Anupmaa jee

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  22. सुंदर आकांक्षा, सुंदर कविता।

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  23. कल 12/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  24. सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति.....

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  25. अपने होने की शुभ आभ ...!!
    और देती है शुभ-लाभ ...!!

    खुबसूरत भाव और अलंकारों से सज्जित कविता....
    वाह...
    सादर बधाई...

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  26. हार्दिक आभार शास्त्रीजी मेरी रचना को चर्चा मंच पर रखने के लिए ...

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  27. बहुत सुन्दर पंक्तियां

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  28. मन की परतें खुलने से दिव्य का दर्शन होता है।

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  29. सुन्दर भावपूर्ण और खूबसूरत अभिव्यक्ति.

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  30. बिल्कुल ही नये अंदाज में मन की बात कही गई है.सुंदर रचना.

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  31. यशवंत जी आभार कविता हलचल पर रखने के लिए.....

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  32. बहुत ही खूबसूरत भाव

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  33. आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आज हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
    आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए..
    MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
    BINDAAS_BAATEN कृपया यहाँ चटका लगाये

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  34. बहुत सुन्दर लगता है आपसे हिंदी सीखनी पढ़ेगी .......

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  35. ओह...अद्वितीय !!!!

    और क्या कहूँ ?

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  36. waah...man mantramughdh ho gaya padhkar..kai baar padhne ke baad bhi man nahi bhara..apratim rachna..bahut bahut badhai.

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  37. Bahut khoob likha hai ... sashakt rachna ke liye badhayee....

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  38. आभार आप सभी का .... मेरी अभिलाषा ....मेरी आकांक्षा ...मेरे मन के भाव समझने और सराहने के लिए ....

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