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29 September, 2011

क्वांर की धूप में .... !!

.
Black buck antelope.
आँगन -आँगन  ....गलियारे ...
मैदान ..मैदान...
कोने-कोने में ...पड़ने लगी है ...
खिलने लगी है धूप  ......
आज फिर आ गया है क्वांर (अश्विन)....!!
तपती क्वांर की   धूप में ....
तप करता है ...
तपता है जैसे मन ...
तपता इस मृग का तन ....
कौन  है  जो  नहीं  तपा .....?
कौन  है जो  बचा  रहा ...?
कभी जब रोकती है.. 
हलकी सी धुप की गर्माहट हमें ...
अलसाई सी इस धूप में ...
जो सो गया वो खो गया ...!!

मौसम  का  क्वांर  तो  आता   है 
 जीवन  में    क्वांर भी  लाता  है....
हमारे जीवन का...?
या इस मृग के जीवन का...?

प्रेरणा पाती हूँ इसकी तपस्या से ...
घंटों धूप में बैठा ....
Basking in the sun.
सहता है धूप की तपिश ....
तप से तप कर ...
जैसे  आग  में  जल  कर..
  कंचन   निखरता है  ...
 निखर  जाता  है मृग  का  तन  भी  ....

धूप में जल-जल कर ....
तप कर ...
तप का उन्माद जब छाया ..
 बन  जाती  है अनमोल  उसकी  काया  ... 
 यही है ..जीवन की..अद्भुत  माया.....!!


According to the Hindu mythology Blackbuck or Krishna Jinka is considered as the vehicle (vahana) of the Moon-god Chandrama.
According to the Garuda Purana of Hindu Mythology, Krishna Jinka bestows prosperity in the areas where they live. The skin of Krishna Mrigam plays an important role in Hinduism, and Brahmin boys are traditionally required to wear a strip of unleathered hide after performing Upanayanam.More importantly...when the antelope sits in the sun for hours together in this season, the skin gets tanned, making it look more beautiful and the colour of the skin becomes more  precious.

Please read this text as just an information to enrich knowledge .
क्वांर से अभिप्राय ...आश्विन मास से है .ये हिंदी महिना सावन ,भादों के बाद क्वांर आता है |इसी क्वांर के महीने में ये हिरन अपने शरीर की काया पलट लेता है ...और फिर उसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं|इसी बात को ध्यान में रखकर ये पोस्ट लिखी है|

27 comments:






  1. आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व की बधाई और
    शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  2. प्रकृति से सब पाते ही हैं,
    जड़ भी एवं चेतन भी...
    मानव तन- मन के सामान ही,
    है यह कृष्ण- हिरन भी .

    बहुत ही सुन्दर रचना एवं साथ में ज्ञान वर्धक जानकारी भी

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  3. कौन है जो नहीं तपा .....?
    कौन है जो बचा रहा ...?
    मौसम का क्वांर तो आता है
    जीवन में क्वांर भी लाता है....
    सुन्दर रचना...!!!

    ReplyDelete
  4. कौन है जो नहीं तपा .....?
    कौन है जो बचा रहा ...?
    मौसम का क्वांर तो आता है
    जीवन में क्वांर भी लाता है....
    सुन्दर रचना...!!!

    ReplyDelete
  5. जीवन की अद्भुत माया की तरह ही अद्भुत लिखा है अनुपमा जी....शक्ति-स्वरूपा माँ आपमें स्वयं अवस्थित हों .शुभकामनाएं.

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  6. बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने! हर एक शब्द लाजवाब है! शानदार प्रस्तुती!
    आपको एवं आपके परिवार को नवरात्रि पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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  7. बहुत ही सुन्दर है आपकी प्रस्तुति
    MADHUR VAANI
    BINDAAS_BAATEN
    MITRA-MADHUR

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  8. तप से तप कर.....
    जैसे आग में जल कर ...
    कंचन निखरता है ....
    बहुत सुंदर रचना . बधाई
    अनीता भाटिया

    ReplyDelete
  9. तप से तप कर.....
    जैसे आग में जल कर ...
    कंचन निखरता है ....
    बहुत सुंदर रचना . बधाई
    अनीता भाटिया

    ReplyDelete
  10. प्रकृति और जीवन की माया को समर्पित सुंदर रचना. दुर्गा-पूजा की शुभकामनाएँ.

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  11. सुंदर भाव,सुंदर कविता।

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  12. दुर्गा पूजा पर आपको ढेर सारी बधाइयाँ और शुभकामनायें !
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  13. कौन है जो नहीं तपा ...? कोई भी तो नहीं | ख़ूबसूरत रचना :)

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  14. धूप में जल-जल कर ....
    तप कर ...
    तप का उन्माद जब छाया ..
    बन जाती है अनमोल उसकी काया ...
    यही है ..जीवन की..अद्भुत माया.....!!
    bhut acha.

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  15. आपको एवं आपके परिवार को दशहरे की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

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  16. बहुत सुंदर रचना और बहुत अच्छी जानकारी भी ...शुभकामनाएं

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  17. सुन्दर रचना ....
    शुभकामनायें आपको !

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  18. nice

    maggin bhaj gaye hai.


    suman

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  19. धूप में जल-जल कर ....
    तप कर ...
    तप का उन्माद जब छाया ..
    बन जाती है अनमोल उसकी काया ...
    यही है ..जीवन की..अद्भुत माया.....!!

    जो सहा सो रहा .. बढिया प्रस्‍तुति !!

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  20. जानकारी से भरपूर अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  21. धूप में जल-जल कर ....
    तप कर ...
    तप का उन्माद जब छाया ..
    बन जाती है अनमोल उसकी काया ...
    यही है ..जीवन की..अद्भुत माया.....!!

    आह! मैं इतनी देर से क्यूँ आया.
    तप के उन्माद से वंचित रहा अब तक.
    आप भी तो देरी कर रहीं हैं न.
    'जप' के उन्माद के लिए मेरे ब्लॉग न आकर.
    खैर,जल्दी से आईयेगा और अपने अमूल्य विचार
    और अनुभव से 'नाम जप' का उन्माद जगाईयेगा.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत आभार.

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  22. सचमुच संडे का पूरा आनंद ले रही हैं आप जो न देख पाईं हैं आज की यह खुशनुमा हलचल :) आज कीनई पुरानी हलचल

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  23. प्रकृति का सामीप्य चमत्कारी है!
    सुन्दर!

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  24. नमस्कार,
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं |
    आप के लिए "दिवाली मुबारक" का एक सन्देश अलग तरीके से "टिप्स हिंदी में" ब्लॉग पर तिथि 26 अक्टूबर 2011 को सुबह के ठीक 8.00 बजे प्रकट होगा | इस पेज का टाइटल "आप सब को "टिप्स हिंदी में ब्लॉग की तरफ दीवाली के पावन अवसर पर शुभकामनाएं" होगा पर अपना सन्देश पाने के लिए आप के लिए एक बटन दिखाई देगा | आप उस बटन पर कलिक करेंगे तो आपके लिए सन्देश उभरेगा | आपसे गुजारिश है कि आप इस बधाई सन्देश को प्राप्त करने के लिए मेरे ब्लॉग पर जरूर दर्शन दें |
    धन्यवाद |
    विनीत नागपाल

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  25. आपके पोस्ट पर आना सार्थक सिद्ध हुआ। मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है ।.दीपावली की शुभकामनाएं ।

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नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!