नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

19 September, 2011

मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ..धीरे -धीरे ...!!

कुछ कहता है ...
मेरा मन ...बहता है ..
जीवन की धारा के संग ...
मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ...धीरे -धीरे ...!! 

जैसे लौट आया है ...
फिर आया है ... 
बचपन का वो रंग
मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ..धीरे-धीरे ...

दूर है किनारा...नैया  खेते जाओ रे ...!!
एकाग्रचित्त ...
नदिया किनारे बैठी....
देख रही हूँ ...सुन रही हूँ ....ह्रदय-गीत
मद्धम-मद्धम ..धीरे-धीरे ..धीरे-धीरे....!!

कल-कल की ध्वनि से जुड़ता ... ..
चप्पू की आवाज़ से उपजता ....
वो जीवन-संगीत .....
मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ...धीरे -धीरे ...!!

हाँ मांझी साथ है मेरे ...
ले जायेगा  मुझे उस पार .....
खेता हुआ मेरी पतवार...!!
मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ...धीरे -धीरे ...!!

41 comments:

  1. एकाग्रचित्त ...
    नदिया किनारे बैठी....
    देख रही हूँ ...सुन रही हूँ ....ह्रदय-गीत
    मद्धम-मद्धम ..धीरे-धीरे ..धीरे-धीरे....!!

    Bemisal.... Bahut pyari panktiyan

    ReplyDelete
  2. Humien to ise aap ki awaaz mein sun'na hai.. Gaakar sunaaiye..dekhiye kitna sangeet hai ismein? hai a ANu Di ?

    ReplyDelete
  3. से लौट आया है ...
    फिर आया है ...
    बचपन का वो रंग
    मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ..धीरे-धीरे ...

    एकाग्रचित्त ...
    नदिया किनारे बैठी....
    देख रही हूँ ...सुन रही हूँ ....ह्रदय-गीत
    मद्धम-मद्धम ..धीरे-धीरे ..धीरे-धीरे....!!

    बहुत ही खूबसूरत गीत.....

    ReplyDelete
  4. इस गीत को पढ़कर एक आध्यात्मिक अनुभूति हुई। बड़ी ही शांत हुआ मन। लगा कि प्रकृति के बीच ध्यानस्थ हो गए।

    आप इन गीतों का पोड़कास्ट भी लगाया कीजिए।

    ReplyDelete
  5. प्रकृति की गति मध्यम ही रहती है, हमारी हड़बड़ी उस परिप्रेक्ष्य में बड़ी फूहड़ लगती है।

    ReplyDelete
  6. जैसे लौट आया है ...
    फिर आया है ...
    बचपन का वो रंग
    मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ..धीरे-धीरे ...

    बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  7. आहा...बेहतरीन...क्या खूब रचना है आपकी...बधाई स्वीकारें

    नीरज

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ||

    ReplyDelete
  9. बहुत ही प्यारी पोस्ट........एक हल्का सा राग छेड़ती......वाह|

    ReplyDelete
  10. हाँ मांझी साथ है मेरे ...
    ले जायेगा मुझे उस पार .....
    खेता हुआ मेरी पतवार...!!
    मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ...धीरे -धीरे ...!!

    जब मांझी हो साथ तब जीवन में संगीत उतर ही आता है मद्धम मद्धम धीरे धीरे ! बहुत सुंदर भावपूर्ण कविता !

    ReplyDelete
  11. सुन्दर ... पोराकृति और पोरेम का अनूठा मिश्रण अहि इस रचना में ...

    ReplyDelete
  12. वाह ...बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  13. एकाग्रचित्त ...
    नदिया किनारे बैठी....
    देख रही हूँ ...सुन रही हूँ ....ह्रदय-गीत
    मद्धम-मद्धम ..धीरे-धीरे ..धीरे-धीरे....!!
    ह्रदय मे संगीत सा बज उठा हो जैसे……………बस ऐसे उतर गयी आपकी आज ये रचना

    ReplyDelete
  14. बढ़िया गीत रचा है आपने!
    इसकी ध्वन्यात्मकता देखते ही बनती है!

    ReplyDelete
  15. जीवन धारा संग बहती
    कुछ शब्दों में.. कितना कुछ कहती
    कविता खिल जाती है
    मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ..धीरे-धीरे ...!!
    बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति!

    ReplyDelete
  16. बेहद खुबसूरत....

    ReplyDelete
  17. प्रकृति की मद्धम और निरंतर गति के साथ- साथ मांझी की संगत से मिलती सुरक्षा का एहसास मन में बसाए हुये आनंदित होने का सचित्र वर्णन करती हुई एक सुन्दर रचना है.

    ReplyDelete
  18. हाँ मांझी साथ है मेरे ...
    ले जायेगा मुझे उस पार .....
    खेता हुआ मेरी पतवार...!!
    मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ...धीरे -धीरे ...!!
    बहुत ही सुंदर नदी किनारे बैठे संगीत का आनंद देती हुई सार्थक रचना /दिल को मधुर संगीत के समान तरंगित कर गई /बहुत बधाई आपको /
    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है /जरुर पधारिये /

    ReplyDelete
  19. kash sabhi aise komal ehsaso se guzer paaye...is jingi ki daud me.

    ReplyDelete
  20. एकाग्रचित्त ...
    नदिया किनारे बैठी....
    देख रही हूँ ...सुन रही हूँ ....ह्रदय-गीत
    मद्धम-मद्धम ..धीरे-धीरे ..धीरे-धीरे....!!बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति!

    ReplyDelete
  21. बहुत सुंदर है आपके प्रस्तुति,
    आभार, विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    ReplyDelete
  22. If put in a rhythm this could be a very beautiful song. Very well written and laid down.

    ReplyDelete
  23. पढ़ कर मन मेरा हुआ झंकृत
    मद्धम-मद्धम ..धीरे-धीरे ..धीरे-धीरे...

    सुँदर कविता , मन प्रफुल्लित हुआ

    ReplyDelete
  24. सुंदर अभिव्यक्ति। प्रकृति का स्वभाव ही है सहज गतिशीलता व संतुलन पूर्ण समायोजन।

    ReplyDelete
  25. हमेशा पढता हूं आपको, अच्छा लगता है।
    बहुत सुंदर रचना,क्या कहने।

    ReplyDelete
  26. बहुत सुन्दर रचना... लफ्ज़ बलफ्ज़ चित्र को परिभाषित सी करती हुयी...
    सादर बधाई...

    ReplyDelete
  27. वाह...वाह...और वाह...

    और तो कुछ है ही नहीं इससे आगे कहने को...

    ReplyDelete
  28. बहुत ही खूबसूरत गीत|

    ReplyDelete
  29. बहुत खूब ...आकर्षक गीत के लिए आभार !
    हार्दिक शुभकामनायें आपको !

    ReplyDelete
  30. मध्यम मध्यम ..धीरे धीरे .. बहुत सुन्दर गीत ...मन को शांति पहुंचाता हुआ ...

    ReplyDelete
  31. वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ।

    ReplyDelete
  32. कुछ मेरे भी ख्यालों में आता है
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    इक टिप्पणी-सी करवाता है
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    बहुत प्यारा-सा लिखा आपने
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    पानी किनारों पर चलता है
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    भीतर कुछ गुन-गुन करता है
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    मुझको मुझसे मिलवाता है
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    चलती नदिया-बहता पानी
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    संग बहती है इसके रवानी
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    समय भी चलता जाता है
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    ना जाने क्या-क्या करवाता है
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    किसी दिन हम भी चले जायेंगे
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    और बीता हुआ कल कहलायेंगे
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    अपने आज को सुन्दर कर लें
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    हम तो सबसे प्यार कर लें
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    धरती फिर से स्वर्ग बन जायेगी
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    अपने बच्चों पर इठलाएगी
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    सबको सबमें जी लेने दो
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    सबमें तुम सब ही बस जाओ
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    संग-संग सबके खिलखिलाओ
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे
    और तब चुपचाप चले जाओ
    मद्धम-मद्धम....धीरे-धीरे !!

    ReplyDelete
  33. kitni sundar rachna... bahati hui hawa si...
    maddham-maddham dheere-dheere...

    ReplyDelete
  34. कुछ कहता है ...
    मेरा मन ...बहता है ..
    जीवन की धारा के संग ...
    मद्धम-मद्धम ..धीरे- धीरे ...धीरे -धीरे ...!!

    आपके मन ने तो बहुत कुछ कह दिया है,अनुपमा जी.

    सोच में डूबी नई पुरानी हलचल से यहाँ आये तो
    आपकी 'मद्धम मद्धम ..धीरे- धीरे...धीरे -धीरे ...!!'
    का ऐसा रंग चढा है कि उतर ही नहीं रहा है.

    वाह! क्या 'अनुपम' सोच में डुबाया है आपने.

    ReplyDelete
  35. बहुत सुन्दर गीत...!

    ReplyDelete
  36. आभार आप सभी का ....इस भाव की लय में शामिल होने के लिए .....!!

    ReplyDelete
  37. आपको मेरी तरफ से नवरात्री की ढेरों शुभकामनाएं.. माता सबों को खुश और आबाद रखे..
    जय माता दी..

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!