नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

10 December, 2011

भव सागर पार लगाओ ...!!!!!!

सर्वप्रथम ...अपनी सौ वीं पोस्ट पर प्रभु का आशीष चाहती हूँ ...


बंसी धुन मन मोह लई..
सुध-बुध मोरी बिसर गई ...
राह कठिन कान्हां.....
तुम बंसी नाहीं बजाओ ...
मग रोकत मोरी सास ननद ...
तुम काहे मोहे सताओ ...

डगर चलत अब बेर भई ...
बंसी धुन कित  टेर रही ...

नटखट श्यामा ...
मन अभिरामा...
छल कीन लियो  ...
मन मोह लियो ...
मैं राह भटक ...
सखी गयी री अटक ...
जल की मटकी ...
अंसुअन से  भरूँ..
हृद की पीड़ा ..
मैं कैसे सहूँ ..?
अब कासे कहूँ री आली ...?
अब कौन सुने री मोरी ...?
तुम  मान भी लो ....
छल  छांड भी दो ..
बिनती सुनलो  मोरी ...
लो हाथ पकड़ मेरा ...
गरवा मोहे लगाओ ..
ओ श्यामा ...
भव सागर पार कराओ... ...!!!!!!

43 comments:

  1. Anupam ji...

    Wah...bahut hi madhur bhav...adhyatmic...chhandatmak...

    Deepak Shukla...

    ReplyDelete
  2. Anupama ji...

    Jo chhod ke maya sath hua..
    Wo sath rahe, wo sang chale..
    venu-dhun main apni usko..
    Ve mugdh kiye, ve bandh chale...

    Jag trushna, kitni hi hain par..
    Uski trushna ka ant nahi...
    Wo bhagwat hai, wo shaswat hai
    ye dhyan rahe, sangyaan rahe..

    Arpan kar baitha jo khud ko..
    Bhav sagar uska paar kare..
    Jag mithya, jagat pralobhan sa..
    Har pal kshan uska saath rahe...

    Jo karya karen, uska maane..
    Bas uska har pal dhyaan rahe..
    Jo dhyan dharen, wo dhyan rahe..
    Saanson se uski jaan rahe...
    Sauvin post par hardik shubhkamnayen...

    Deepak Shukla..

    ReplyDelete
  3. अनुपमा जी ! सौ वीं पोस्ट केलिए बहुत =बहुत बधाई..हृदय से जो विनती की है भव सागर पार , पक्का समझो...

    ReplyDelete
  4. मन को बहुत सुकून देती रचना.....

    ReplyDelete
  5. सर्वप्रथम सौ पोस्टों की सफलतापूर्वक यात्रा पूरी करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं।
    रचना के भाव मन को हरते हैं।

    ReplyDelete
  6. सौ पोस्टों की सफलतापूर्वक यात्रा पूरी करने के लिए बधाई और शुभकामनाएं।

    ReplyDelete
  7. बहुत उम्दा!
    सौवीं पोस्ट की शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  8. सौ वीं पोस्ट बहुत-बहुत मुबारक हो!

    ReplyDelete
  9. sabse pahle to apki 100v post par bahut bahut badhayi.

    aur ye geet sun kar aanand aa gaya.

    ReplyDelete
  10. सौंवी पोस्ट और इतने सुन्दर गीत के साथ ... बहुत अच्छा लगा

    ReplyDelete
  11. प्रेम और भक्ति का सुन्दर समन्वय-मधुर गीत !

    ReplyDelete
  12. आपको ढेरों बधाईयाँ, कान्हा ख्याल रखेंगे।

    ReplyDelete
  13. सौंवी पोस्ट के लिए बधाई और भगवान की कृपा तो आप पर है ही तभी इतनी सुन्द्त रचना का सृजन संभव है |

    ReplyDelete
  14. आपकी शतकीय पोस्ट को निश्चित ही प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त है...!

    ReplyDelete
  15. सौवीं पोस्ट की बधाई .. सुंदर भाव लिए रचना

    ReplyDelete
  16. मन भावन कविता...
    १०० वीं पोस्ट की बधाई...आंकड़ा जल्द ही १००० पहुंचे.
    शुभकामना.

    ReplyDelete
  17. आपकी १००वी रचना के लिए बहुत बहुत बधाई |
    आशा

    ReplyDelete
  18. सेंचुरी लगाने के लिए बहुत-बहुत बधाई..... !!!!
    अंसुअन से भरूँ ,हृद की पीड़ा.... !
    मैं कैसे सहूँ.... ? अब कासे कहूँ री आली ...?
    अद्भुत अभिव्यक्ति.... उत्तम रचना.... !!

    ReplyDelete
  19. बिनती सुनलो मोरी ...
    लो हाथ पकड़ मेरा ...
    गरवा मोहे लगाओ ..
    ओ श्यामा ...
    भव सागर पार कराओ...

    - बहुत सुन्दर रचना
    सचिन से पहले शतक पूरा करने के लिए बधाई .

    ReplyDelete
  20. अभी तो आपको सौं वीं पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाई.
    फिर आता हूँ.

    ReplyDelete
  21. सौवीं पोस्ट की बधाई ... श्याम के रंग में रंगी सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  22. बहुत ही मनभावन पोस्ट!

    पोस्टों के शतक के लिए बहुत बहुत बधाई!

    सादर

    ReplyDelete
  23. बंसी धुन मन मोह लई..
    सुध-बुध मोरी बिसर गई ...
    राह कठिन कान्हां.....
    तुम बंसी नाहीं बजाओ ...
    मग रोकत मोरी सास ननद ...
    तुम काहे मोहे सताओ

    bahut sundar Anupama ji ... abhar

    ReplyDelete
  24. अनुपमा जी भव तो वही पार लगाते है और लगा भी रहें हैं हमारा काम है केवल प्रार्थना का सही काम करना . आपको सौवी पोस्ट के लिए बधाई..

    ReplyDelete
  25. Heartly congratulation for centuri.

    ReplyDelete
  26. सौवीं पोस्ट की शुभकामनाएं………भक्ति रस से ओत प्रोत रचना।

    ReplyDelete
  27. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 12-12-2011 को सोमवारीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

    ReplyDelete
  28. भक्तिभाव से भरी सौवीं रचना के लिए बधाई और शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  29. सौवीं पोस्ट की बधाई .. सुंदर भाव लिए खूबसूरत रचना|

    ReplyDelete
  30. बहुत सुन्दर........बधाई हो |

    ReplyDelete
  31. अनुपमा जी, शतक लगाने पर बधाई! कान्हा से की गयी मनुहार बहुत मधुर है वह तो रीझ ही जायेंगे और फिर आपके मधुर स्वर में जब यह प्रार्थना होगी तब सोने पर सुहागा...

    ReplyDelete
  32. तुम मान भी लो ....
    छल छांड भी दो ..
    बिनती सुनलो मोरी ...
    लो हाथ पकड़ मेरा ...
    गरवा मोहे लगाओ ..
    ओ श्यामा ...
    भव सागर पार कराओ... ...!!!!!!

    आपकी भक्ति रस से परिपूर्ण सौं वीं पोस्ट को हृदय से नमन.
    आपके पवित्र हृदय की करूण पुकार दिल को छू रही है.

    ReplyDelete
  33. सुन्दर शब्दों से सुसज्जित लाजवाब रचना लिखा है आपने !बधाई!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    ReplyDelete
  34. १०० वी पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    सुंदर प्रस्तुति...
    मेरी नई पोस्ट में
    सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लु भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूब रहा है, नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें थे तुमने, जनता सबक सिखायेगी,

    आपका इंतजार है
    ________________

    ReplyDelete
  35. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 15 -12 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज... सपनों से है प्यार मुझे . .

    ReplyDelete
  36. १०० वी पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाई.......

    ReplyDelete
  37. कान्हा का सुंदर मनुहार,१०० वीं पोस्ट की बधाई,...

    मेरी नई पोस्ट केलिए काव्यान्जलि मे click करे

    ReplyDelete
  38. aapki muskaan ki tarah hi pyari hai aapki rachna :) badhai :)

    ReplyDelete
  39. ह्रदय से आभार ...आप सभी का ...सुकृती पर शुभकामनाओं की वर्षा के लिए ....!!
    पाठक का ह्रदय विशाल होता है ....!उम्मीद है मेरी गलतियाँ क्षमा करेंगे आप और इस सफ़र में मेरा मार्ग दर्शन करते रहेंगे ...

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!