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27 December, 2011

नैहरवा हमका न भावे ....!!

कबीर पढ़ना और गाना अपने आप में एक आलौकिक आनंद देता है .....!!उनके भाव गाते वक़्त मैं इस दुनिया में होते हुए भी नहीं होती .....!!


जब ज्योति जलती है ... हमारे बीच  ...प्रेम की ...ज्ञान की ...भक्ति की ...हमारे अंदर ....
जब हम वेद-पुराण की बात करते हैं ....अपनी सभ्यता संस्कृति की बात करते हैं ...अपनी भावनाओं की बात करते हैं ...तो सहज ही ध्यान आता है कबीरदास जी का ...उनके दोहों को पढ़ना और सुनना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है ...!
पहले हम जीवन में भोग और विलास के  पीछे भागते हैं एक अंधी दौड़ में ..जो हमें चाहिए उसके पीछे ....जब वो सब हमें मिल जाता है ...तब एक अजीब से खालीपन का एहसास होता है ...और याद आते हैं वो प्रभु जिन्हें हम अपने व्यस्त जीवन में....भूले- बिसराए बैठे हैं ...प्रभु से एकाकार होने का मन करता है ....और लगता है ...

साईं की नगरी परम अति सुंदर ...
जहाँ कोई जावे  न आवे ...

उस नगरी तक ....उस प्रभु तक मैं अपना संदेस ...कैसे पहुँचाऊँ ...?

बिन सतगुरु आपनो नहीं कोई .....कहत कबीर सुनो भाई साधो ....सपने में प्रीतम आवे ...
जी हाँ अगर गुरु कृपा हो तो रास्ता आसान हो जाता है ....
कबीरदास जी कहते हैं ....

नैहरवा हमका न भावे ....

साईं की नगरी परम अति सुंदर ...अति सुंदर ...
जहाँ कोई जाए न आवै ..
चाँद सूरज जहाँ पवन न पानी ...
को संदेस पहुँचावे ...
दरद यह साईं को सुनावे ...
नैहरवा ....

बिन सतगुरु आपनो नहीं कोई ...
आपनो नहीं कोई ...
जो यह राह बतावे ...
कहत कबीरा सुनो भाई साधो ..
सपने में प्रीतम आवै ...
तपन यह जिया की बुझावे ...
नैहरवा .... 



इस गीत पर अन्य कलाकारों का सहयोग इस प्रकार है ...

हारमोनियम पर -नयन व्यास जी
सिंथ पर हैं -डॉ.मुकुल आचार्य जी
तबले पर -हामित वालिया जी
होस्ट हैं -डॉ पूनम कक्कड़  जी.


40 comments:

  1. बहुत बहुत आभार पूनम जी ...!!

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  2. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 28-12-2011 को चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  3. वाह ...बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  4. वाह इतना मधुर कंठ और कबीर दास जी के ये बोल ... सुने पे सुहागा ...

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  5. कबीर को आपके मुख से सुनना एक अद्भुत अनुभव है..बहुत बहुत बधाई! नए वर्ष की शुभकामनायें!

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  6. बहुत अच्छी प्रस्तुति.

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  7. अद्भुत! किसी और लोक से हो आया मैं इसे सुनकर।
    इस तरह के भजनों को सुनकर जो चैन और सुकून मिलता है वह अवर्णननीय है!!

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  8. भावविह्वल करती प्रस्तुति।

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  9. कल 28/12/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, कौन कब आता है और कब जाता है ...

    धन्यवाद!

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  10. आनद आ गया आदरणीया अनुपमा जी....
    सादर.

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  11. माँ सरस्वती की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे .

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  12. कबीर जी की प्रस्तुति देखकर मन भाव विभोर हो गया

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  13. सुन्दर प्रस्तुति.

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  14. सुन्दर प्रस्तुति.

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  15. बहुत बहुत सुन्दर....
    बधाई आपको.

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  16. अहा ... अनुपमा तुमने तो मन खुश कर दिया

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  17. अलौकिक अनुभूति कराती पोस्ट .

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  18. मधुर स्वरों में गीत सुनना बहुत ही मुग्ध कर गया, गीत का लोक पुट मन को छू गया.

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  19. आप जैसी सन्त और भक्त हृदया से ब्लॉग जगत में
    परिचय हुआ यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है.

    आपका गायन, कबीर की वाणी,हारमोनियम, तबले
    आदि का साथ मुझे एक अनुपम अलौकिक जगत का
    अनुभव कराता है.स्वर की मार्मिकता से मन द्रवित
    होता जाता है.

    आपका और सभी का बहुत बहुत हार्दिक आभार.

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  20. kabir ji ki lekhi ka apke dwara gayan bahut hi adbhut sanyojan...

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  21. सुंदर आवाज और बेहतरीन गायकी से आपने कमाल कर दिया ,......
    नए साल की शुभकामनाए .......

    मेरे पोस्ट के लिए --"काव्यान्जलि"--"बेटी और पेड़"-- मे click करे

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  22. सुन्दर प्रस्तुति ...

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  23. रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  24. रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  25. बड़ा ही सुन्दर गाया, कबीर सदा ही प्रभावित करते हैं..

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  26. कबीर और निर्गुण ब्रम्ह . अनिवर्चनीय आनंद की अनुभूति हुई आपको सुनकर . आभार .

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  27. बहुत सुंदर प्रस्तुती बेहतरीन गायन ,.....
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाए..

    नई पोस्ट --"काव्यान्जलि"--"नये साल की खुशी मनाएं"--click करे...

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  28. हर पल ज्योतिर्मय हो..

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  29. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
    vikram7: आ,साथी नव वर्ष मनालें......

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  30. नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

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  31. आपको और परिवारजनों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  32. नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं......

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  33. कबीरदास जी का यह भजन पसंद करने के लिए आप सभी का आभार ...

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  34. कबीर सुनना सदा ही अच्छा लगता है..उस पर से आपका गायन...सोने पे सुहागा इसे ही तो कहते हैं.

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