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09 August, 2021

मुझ तक आ गया !!

समुद्र के किनारे ,

पसरे हुए सन्नाटे के बीच 

मुझसे बोलता हुआ अनहद 

कुछ मुझको जता गया 

जड़ से चेतना ,

संवाद से संवेदना ,

का मार्ग प्रशस्त कर ,

लहरों से बोलता हुआ समुद्र 

यूँ ही
मुझ तक आ गया !!

अनुपमा त्रिपाठी 
 ''सुकृति "

13 comments:

  1. बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है यह्। मुझे भी समुद्र के किनारे खड़े रहकर लहरों को निहारने का शौक़ है और मुझे भी ऐसी ही कुछ अनुभूतियां उस समय होती हैं।

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 10 अगस्त 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. हृदय से धन्यवाद आदरणीय दिग्विजय जी ।मेरी रचना को इस मंच पर स्थान दिया गौरवांवित हूँ ।

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  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (10-8-21) को "बूँदों की थिरकन"(चर्चा अंक- 4152) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    --
    कामिनी सिन्हा

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद कामिनी जी आपने मेरी रचना का चयन किया चर्चा अंक के लिए ।

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  4. सागर किनारे...सुंदर भावों और एहसासों का उत्कृष्ट सृजन।

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  5. अनन्त तरंग, अनवरत। न जाने क्या कहना चाहे सागर। रोचक भाव।

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  6. वाह , अब समुद्र ने भी पहुँच बना ली । बेहतरीन अभिव्यक्ति ।

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  7. बहुत सुंदर रचना

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  8. वाह बढिया है।

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  9. गहरा एहसास जीएवन का .. लहरों के माध्यम से बहुत कहा जाता है ... संवाद हो जाता है ...

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  10. गहन रचना बहुत कुछ, कम शब्दों में बयां करती हुई - - अभिनन्दन आदरणीया।

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