नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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02 July, 2021

सघन तिमिर में






 रहता नहीं जब

कोई भी समीप -

सघन तिमिर में, 

हृदय  में 

घनीभूत आश्वस्ति सा 

टिमटिमाता रहता  है

वही दीप ,

सघन तिमिर में !!


पूस की रैन

जाग जाग कर बीतती है,

जब टीस हृदय की

आस लिए नैन बसती है,

ओस पात पात जमती है ,


नैराश्य से लड़ता है मन ,

आशा का रहता है संचार

जब सघन तिमिर में,

तारों सी निसर्ग पर ,

तब भी रहती है,

उद्दीप्त  मुस्कान,

सघन तिमिर में  !!


संवेदनाएं तरंगित कर देती हैं

अनुकूल भाव हृदय  के ,

पंखों में उड़ान भर ,

पाखी करते हैं 

नव प्रात का स्वागत ...!!!

शनैः शनैः

तिरोहित होता जाता है तमस

भी तब सघन तिमिर में 


अनुपमा त्रिपाठी

"सुकृति "