''ज़िंदगी एक अर्थहीन यात्रा नहीं है ,बल्कि वो अपनी अस्मिता और अस्तित्व को निरंतर महसूस करते रहने का संकल्प है !एक अपराजेय जिजीविषा है !!''
पसरे हुए सन्नाटे के बीच
मुझसे बोलता हुआ अनहद
कुछ मुझको दे गया
जड़ से चेतना ,
संवाद से संवेदना ,
का मार्ग प्रशस्त कर ,
लहरों से बोलता हुआ समुद्र
यूँ ही मुझ तक आ गया !!