''ज़िंदगी एक अर्थहीन यात्रा नहीं है ,बल्कि वो अपनी अस्मिता और अस्तित्व को निरंतर महसूस करते रहने का संकल्प है !एक अपराजेय जिजीविषा है !!''
जाग री...
बीती विभावरी
खिल गए सप्त रंग
उड़ते बन पखेरू
मन पखेरू
विभास के संग
शब्द प्रचय से संचित
मुतियन बुँदियन भीग रहा मन
प्राची का प्रचेतित रंग
बरसे घन
घनन घनन
बन जलतरंग
जीवन उमंग
छाया अद्भुत आनंद !!
अनुपमा त्रिपाठी
'सुकृति '