नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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28 May, 2021

जाग री...

 


जाग री...

बीती विभावरी 

खिल गए सप्त रंग 


उड़ते बन पखेरू

मन पखेरू 

विभास के संग 

शब्द प्रचय से संचित

मुतियन बुँदियन भीग रहा मन 

प्राची का प्रचेतित रंग 

बरसे घन 

घनन घनन 

बन जलतरंग 

जीवन उमंग 

छाया अद्भुत आनंद  !!


अनुपमा त्रिपाठी 

  'सुकृति '