चन्द्रिका तुम आओ ....!!
प्रेम भरा धरती पर धरो पग ..
अपने स्पर्श मात्र से ..
दिवसाग्नि को तनिक ...
शीतलता दे जाओ ....!!
अब निरंतर निर्झर झरो ...
मृणाल पात पर मेरे धर जाओ ....
अपनी सम्पूर्ण धरोहर ...
एक बूँद ओस सी मनोहर .....!!
महत् आनंद सरसाओ ....
चन्द्रिका तुम आओ ...
तुम्हारा ..शीतल रजत प्रकाश ...
यूँ हो सार्थक अविरत ...
सीमित से इन क्षणों में ....
असीम भाव बरसाओ ......!!
चन्द्रिका तुम आओ ...!!
