1-
हृदय वही
पिघले मोम जैसा,
पाषाण नहीं ।
मोम-सा मन
आंच मिली ज़रा सी ..
पिघल गया ।
3-
प्रवाह लिये
सरिता- सा हृदय
बहता गया ।
मेघ -घटाएँ.
छाई उर -अम्बर
6-
घटा सावन ,
7-
घटा सावन ,
भिगोये तन मन ..
प्रेम बरसे
प्रेम बरसे
मन मीन क्यों
आकुल रहती है
लिये पिपासा...?
मेरा हृदय
आस की डोर बँधा.
पतंग बना ।
