नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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17 September, 2012

हृदय के रूप .......(हाइकू)

1-
हृदय  वही  
पिघले मोम जैसा,
पाषाण नहीं । 

2-
मोम-सा मन
आंच मिली ज़रा सी ..
पिघल गया  ।
3-
प्रवाह लिये  
सरिता- सा  हृदय
बहता गया  ।
4-
छाई बादरी 
बरसती  बूंदरी ....
नाचे  मयूर .. ..

5-
मेघ -घटाएँ.
छाई उर -अम्बर
भाव बरसें ।

6-
घटा सावन ,
भिगोये तन मन ..
प्रेम बरसे 

7-
मन मीन क्यों 
आकुल रहती है
लिये पिपासा...?

8-
मेरा हृदय
आस की डोर बँधा.
पतंग बना ।