नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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19 July, 2013

आज रात चाँद को पुकारती रही


आज रात चाँद को पुकारती रही
व्योम मंच पर न किन्तु चाँद आ सका....
बादलों की ओट में कहीं रहा छिपा
दामिनी प्रकाश पुंज वारती रही ....
आज रात चाँद  को पुकारती रही ...

देखती रही खड़ी नयन पसार कर ...
है वियोग ही मिला सदैव  प्यार कर ...
तारकों से आरती उतारती रही ...

आज रात चाँद को पुकारती रही ...

हो गई उदास और रात रो पड़ी....
वारने लगी अमोल अश्रु की लड़ी ...
दूर से खड़ी उषा निहारती रही ...
आज रात चाँद को पुकारती रही ....

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शोभा श्रीवास्तव का लिखा ये गीत .....
अब सुनिए मेरी आवाज़  में.......
कृपया ईयर फोन से  सुने अन्यथा आवाज़ बिखरती है ....




26 June, 2013

देवभूमि बन .... रहने दो मन ...

छाई कैसी अंधियारी ....!!
गगन मेघ  काले  देख ...
मछली सी तड़प उठी ...
कलप उठी पीर....
 बहे अंसुअन नीर ....

त्रिदेव ...बंद करो त्रिनेत्र का तांडव ...
बहुत भुगत चुकी अब ....

होने दो ..फिर आज ...
नित  प्रात  की ...
निज  प्रात ...!!
अढ़सठ तीरथ घट भीतर मेरे ....
स्फटिक के शिवलिंग सजात ...!!

मोगरे के पुष्प तोड़ ...
जग  से मुख मोड़  ...

आज घट भीतर करूँ अर्पण ....
स्वीकारो मेरा कुसुम तर्पण ...

पुनः करूँ वंदन .....
वंदनवार बनाऊँ ...
मन-मंदिर  सजाऊँ ...

प्रकृति सा प्राकृत ....
पुनः   करो सुकृत ...
देवभूमि बन ....
अब रहे  मन ...




24 September, 2012

रचना मेरी ,.... ..(हाइकु )



रचना मेरी ,
मनभावन बने ..
वरदान दो ..

रचना मेरी , मनभावन बने .. वरदान दो ..

पवन बहे  ...
जियरा भरमाये ..
मनवा गाये ..



प्रेम   ऐसा  हो ...
जीवन रंग भरे ..
 चढ़ता जाए ..


रंग ऐसे हों ..

खिले हुए सुमन ..
रंगें जीवन ....



दुःख दे गया ..

बैरी पवन झोंखा ..
लट उलझी ...


बहती हवा ..
उलझा गयी लटें ...
जियरा डोले ..

बरस रही ...
सरस  बदरिया .. ..
स्मृतियाँ लिए .. .....


समय संग ...
मन  बहता जाए ..
सहता जाए .. ..

तुम न आये ....
याद अब न जाए ...
किससे  कहूँ  ...?


बैरी मनवा ,
बात न माने मोरी ....
रैन जगाये ...
काहे  बिदेस ..
गए  हो रसिया ..
मन बसिया ..

मन बतियाँ ,
कासे कहूं  आली री...
पिया निर्मोही ...

नैना निहारें  ..

सूनी भई  डगर ...
पिया ना आये ...

निर्मोही संग ,
काहे  नेहा लगाये  .....
क्यों  पछताए ..??