नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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20 April, 2021

लगता है कोई है कहीं ....!!!!!!!!!!!!!!


अनुनाद
अंतर्नाद  बन
आत्मसंवाद सा ,
छिपा होता  है
हृदय में इस तरह ,
हवा में सरसराते पत्तों की
आहाट  में कभी .......
लगता है कोई है कहीं    ..!!

कभी   ....
नदिया की धार सा
बहता है  जीवन ....
नाव खेते माझी सी
तरंगित लहरों पर...
कल कल छल छल
अरुणिमा की लालिमा ओढ़े,
गाती गुनगुनाती है ज़िंदगी ....,!!
लगता है कोई है कहीं ....

कभी गुलाब सी
काँटों के बीच यूं खिलती
मुसकुराती है   ,
अनमोल रचती
भाव की बेला सी ,
लगता है कोई है कहीं ...

कभी रात के अंधेरे में  भी ,
जुगनू की रोशनी सी ,
घने जंगल में भी ,
टिमटिमाती हुई
एक आस रहती है ,

लगता है कोई है कहीं !!

अनुपमा त्रिपाठी
  "सुकृति "