नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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05 May, 2021

जीवन ही तो है!!!

                                                                                    



 जीवन के पड़ाव और 

सूरज के उगने से 

सांझ के आने तक की यात्रा 

 तुम्हारे  मौन रहने से 

अनहद तक यूँ ही 

कुछ  कुछ कहते रहने की यात्रा ,

अनगिन शब्द 

कागज़ पर उकेरने की यात्रा

या 

मन के भाव 

कैनवास पर उभारने की यात्रा ,

मैं से मैं तक ,

अनेक यात्राओं में 

रहने ,बिखरने और सिमटने की यात्रा 

जीवन ,जीवन के लिए 

जीवन ही तो है !!!



अनुपमा त्रिपाठी 

 ''सुकृति ''


26 April, 2021

आज मैं चुप हूँ

आज मैं चुप हूँ
कलम 
तुम बोलो ,
रस रंग
जिया के भेद, अनोखे खोलो

कठिन राह
जीवन की
अब तुम
सरल बनाओ
जब भी प्रेम
लिखो तुम निर्मल,
नद धार धवल बहाओ
और फिर चलो उठो मन
आज तुम भी गाओ

श्यामल बदरी की कथा 
बूंदन बरस रही
हरियाली धरती पर
खिल खिल हरस रही

जोड़ जोड़ अब शब्द
लिखो तुम मन की भाषा
जो कहती कहने दो
जीवन की अभिलाषा

साँस साँस में बसा जो जीवन
है अनमोल
लिख डालो कुछ शब्दों में
है जो भी इसका तोल

अनुपमा त्रिपाठी
"सुकृति "

20 April, 2021

लगता है कोई है कहीं ....!!!!!!!!!!!!!!


अनुनाद
अंतर्नाद  बन
आत्मसंवाद सा ,
छिपा होता  है
हृदय में इस तरह ,
हवा में सरसराते पत्तों की
आहाट  में कभी .......
लगता है कोई है कहीं    ..!!

कभी   ....
नदिया की धार सा
बहता है  जीवन ....
नाव खेते माझी सी
तरंगित लहरों पर...
कल कल छल छल
अरुणिमा की लालिमा ओढ़े,
गाती गुनगुनाती है ज़िंदगी ....,!!
लगता है कोई है कहीं ....

कभी गुलाब सी
काँटों के बीच यूं खिलती
मुसकुराती है   ,
अनमोल रचती
भाव की बेला सी ,
लगता है कोई है कहीं ...

कभी रात के अंधेरे में  भी ,
जुगनू की रोशनी सी ,
घने जंगल में भी ,
टिमटिमाती हुई
एक आस रहती है ,

लगता है कोई है कहीं !!

अनुपमा त्रिपाठी
  "सुकृति "