जीवन के पड़ाव और
सूरज के उगने से
सांझ के आने तक की यात्रा
तुम्हारे मौन रहने से
अनहद तक यूँ ही
कुछ कुछ कहते रहने की यात्रा ,
अनगिन शब्द
कागज़ पर उकेरने की यात्रा
या
मन के भाव
कैनवास पर उभारने की यात्रा ,
मैं से मैं तक ,
अनेक यात्राओं में
रहने ,बिखरने और सिमटने की यात्रा
जीवन ,जीवन के लिए
जीवन ही तो है !!!
''सुकृति ''




