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20 April, 2021

लगता है कोई है कहीं ....!!!!!!!!!!!!!!


अनुनाद
अंतर्नाद  बन
आत्मसंवाद सा ,
छिपा होता  है
हृदय में इस तरह ,
हवा में सरसराते पत्तों की
आहाट  में कभी .......
लगता है कोई है कहीं    ..!!

कभी   ....
नदिया की धार सा
बहता है  जीवन ....
नाव खेते माझी सी
तरंगित लहरों पर...
कल कल छल छल
अरुणिमा की लालिमा ओढ़े,
गाती गुनगुनाती है ज़िंदगी ....,!!
लगता है कोई है कहीं ....

कभी गुलाब सी
काँटों के बीच यूं खिलती
मुसकुराती है   ,
अनमोल रचती
भाव की बेला सी ,
लगता है कोई है कहीं ...

कभी रात के अंधेरे में  भी ,
जुगनू की रोशनी सी ,
घने जंगल में भी ,
टिमटिमाती हुई
एक आस रहती है ,

लगता है कोई है कहीं !!

अनुपमा त्रिपाठी
  "सुकृति "

11 comments:

  1. निःसंदेह है...तभी तो ये संसार कायम है.

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  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (२१-०४-२०२१) को 'प्रेम में होना' (चर्चा अंक ४०४३) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    Replies
    1. सादर धन्यवाद अनीता जी।

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  3. हवा में सरसराते पत्तों की
    आहाट  में कभी .......
    लगता है कोई है कहीं।।

    बहुत ही सुन्दर

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  4. बहुत सुंदर भाव, लगता है कोई है कहीं, जो दिखता नहीं पर जिसकी उपस्थिति सदा उसकी याद दिलाती है, वही तो प्रेम है

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  5. बहुत खूबसूरती से निराशा को आशा में बदलने की ख्वाहिश सी ...कोई है ...

    हमेशा की तरह सुन्दर शब्दों से रची सुन्दर रचना ...

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  6. कभी रात के अंधेरे में भी ,
    जुगनू की रोशनी सी ,
    घने जंगल में भी ,
    टिमटिमाती हुई
    एक आस रहती है ,

    अति सुंदर सृजन,सादर नमन आपको

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  7. सुन्दर रचना

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  8. बहुत सुन्दर।
    --
    श्री राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    --
    मित्रों पिछले तीन दिनों से मेरी तबियत ठीक नहीं है।
    खुुद को कमरे में कैद कर रखा है।

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    Replies
    1. ईश्वर से प्रार्थना है आप जल्दी स्वस्थ हों।

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  9. यह अहसास कि 'कोई है कहीं' ही तो जीने की आरज़ू को मरने नहीं देता फिर जीना चाहे कितना ही मुश्किल क्यों न हो। बहुत अच्छे और काबिले तारीफ़ अशआर निकले हैं आपकी क़लम से।

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