नैना रो रो नीर बहाये
बैरी सावन बीतत जाये
अंखियन कजरा बोल रहा है
सजनी का जिया डोल रहा है
हिरदय की पीड़ा कहती है
नैनं से नदिया बहती है
दामिनी दमक दमक डरपाए
कोयलिया की हूक सताए
झड़ झड़ लड़ी सावन की लागि
आस दिए की जलती जाये
बैरी सावन बीतत जाये
अनुपमा त्रिपाठी
"सुकृति "
