नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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20 April, 2012

आग लक्ष्य की .....!!


उर से -
आग लक्ष्य की ..
कभी बुझी नहीं .....
इन राहों पर .. मैं ..
इक पल भी ..
कभी रुकी नहीं ......
पथरीले रास्तों पर चलते चलते ...
रिसने लगा  खून .....
चलती  रही  मैं  ...अनवरत  ...
मूँद कर नयन ...एकाग्रचित्त ...
सुरों की माला जपती .......
स्वयं को बूझती...
 फिर भी ...
स्वयं से अपरिचित ....!!

बीतता रहा समय ...
चलती रही मैं ...
अब ..धीरे धीरे होता जाता है ...
कुछ आभास तुम्हारी उपस्थिती का ...
 और कुछ विश्वास मेरी प्रतीति का ... ...
हवा में फैली ..
तुम्हारी खुशबू है ...!!
जानती हूँ...
तुम्हें पहचानती हूँ ...
अनुनेह मेरा ग्रहण करोगे ...
 निर्मोही नहीं हो तुम ...
क्योंकि जानते हो ...
दर्शन पाए बिना तुम्हारे ....
नयनो की प्यास बुझेगी नहीं ...
अंतर्मन की ...
ये ज्वाला  बुझेगी नहीं ....!!

अपने भक्तों को
छटपटाता देख सकते हो .....
तो जलने दो मुझे ...
युगों युगों तक ऐसे ही .....
दर्शन पाए बिना तुम्हारे ...
तृषा से व्याकुल ...
जलती रहेगी मेरी काया ....!!
तपन जिया की बन के ...
प्रकट हो  ....
हे प्रभु ...दर्शन दो ....!!
ज्ञान से पथ प्रशस्त करो ..
भव तार दो ...!!

07 March, 2012

तुमरी राधा रह जाऊं .. .....!!!!



सील संतोस से
चन्दन  घोर घोर ...
केसर रंग पोर पोर ......
हियरा में उठत हिलोर ....
प्रेम प्रीत पिचकार बनाई..
होरी आई सब रंग ,रंग लाई  ...
श्याम तुम रंगे सब रंग ...
मैं कैसे खेलूं होरी श्याम के संग ...
रंगूँ तुम्हें अब किस विध  अपने रंग ...?
होरी कैसे खेलूं श्याम के संग ...?
आज मैं ही रंग जाऊं श्याम के प्रेम रंग ...!!

तुम से  लिप्त ...
तुम में  लिप्त ...
ऐसी खो जाऊं ...
तुम रक्षक प्रभु मेरे ...
बांस की बाँसुरिया नेक  बजाऊं ......
तुमरी तान मगन जब गाऊं ...
सुध-बुध  बिसराऊं  ...
प्रेम राग, भर अनुराग ,फाग सुनाऊं ......
आज मान दो इतना ...
युगों-युगों तक ...
मैं ही बस ..
तुमरी  राधा रह जाऊं .. .....!!!!