
शब्द की उस आकृति को
भाव की उस स्वकृति को ,
शब्द शब्द गढ़ दूँ अगर तो
भाव कैसे पढ़ सकोगे .....?
जीवन की यह वेदना है ,
जब नहीं संवाद न संवेदना है ,
है जगत की रीत यह तो ,
दो घड़ी की प्रीत यह तो,
जल भरा यह कलश मेरा ,
भाव रंग अपने भरोगे ....!!
*************
स्याही से
लिखते हुए
उज्ज्वल भाव भी
स्याह क्यों दिखते हैं ......?
दो घड़ी की प्रीत यह तो,
जल भरा यह कलश मेरा ,
भाव रंग अपने भरोगे ....!!
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स्याही से
लिखते हुए
उज्ज्वल भाव भी
स्याह क्यों दिखते हैं ......?
