नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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04 March, 2015

बूंद रंग अपने भरोगे ...


शब्द की उस आकृति को
भाव की उस स्वकृति  को ,
शब्द शब्द गढ़  दूँ अगर तो
भाव कैसे पढ़ सकोगे .....?

जीवन  की यह वेदना है ,
जब नहीं संवाद न संवेदना है ,
शब्द मेरे ही हों किन्तु
भाव रंग अपने भरोगे...!!

है जगत की रीत यह तो ,
दो घड़ी की प्रीत यह तो,
जल भरा यह कलश मेरा ,
भाव रंग अपने भरोगे ....!!

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स्याही से
लिखते हुए
उज्ज्वल भाव भी
स्याह क्यों दिखते हैं ......?