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. हिंदी कविता . .जीवन . निराशा उदासी.
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रे मन
प्रेम पर ठहरी हैं
झील सी गहरी हैं
तोरे मन की बतियाँ ......
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प्रवृत्ति है ये जल की ,
जल भी
जब कभी नदी सा
कल कल कल कल ....
बह नहीं पाता
तब भी रुका हुआ .....
यह जल ,
सरोवर में,
ठहरा हुआ ,
शब्दों के हृदय कमल
है खिलाता !!