नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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19 September, 2014

क्षणिकाएं.....!!

रे मन
प्रेम पर  ठहरी हैं
झील  सी गहरी हैं
तोरे मन की बतियाँ ......
********************
प्रवृत्ति है ये जल की ,
जल  भी
जब कभी नदी सा
कल कल कल कल ....
बह नहीं पाता
तब भी रुका हुआ .....
यह जल ,
सरोवर में,
ठहरा हुआ ,
शब्दों    के  हृदय कमल
  है खिलाता !!

06 September, 2014

तुम्हारे मेरे बीच की कड़ी

तुम्हारे मेरे बीच की कड़ी
सिर्फ एहसास ही नहीं है,
सिर्फ शब्द ही नहीं है,
सिर्फ प्रेम ,ईर्ष्या ,द्वेष या
सिर्फ  आक्रोश  भी नहीं है
बल्कि संकुलता से  परे ,
तुम्हारा वो सशक्त मौन है ,
मेरे चारों तरफ ,
जो तुम्हारे होने का प्रमाण  देता है
अपनी ऊर्जस्वितता में,

और बांधे रखता है सदा ,
दुख सुख में ,
हमे इस अटूट  बंधन में...!!

18 August, 2014

हे कृष्ण कृष्णा.....!!





हे कृष्ण कृष्णा,
नेक सम्हालो  मेरी तृष्णा,
विभूषित प्रमुदित मन करो,
अभिनीत हृदय वीणा को स्वरों  का
अलंकार दो,
संवेदना का जीवन में
संचार दो ,
इक बूंद गिरे
मुझ चातक का,
सोया जीवन
 झंकार दो ....!!



15 March, 2014

अबकी होरी ....(हाइकु )



प्रेम की बोली ,
रंग रंगीली होली
चन्दन रोली

सूर्योदय सी
उदित प्रमुदित
खिली आशाएँ

शुभ जीवन
राग अनुराग सा ,
खिला है मन

लाई प्रभास
किरणों की टोली
आई है होली

मन पलाश
ज्यों  अबीर गुलाल
है लाल लाल

शील संतोष
केसर रंग घोरी
अबकी होरी


शुभकामना
रंग माथे लगाऊँ
होरी रचाऊँ


है रंग रंग
सतरंग उमंग
बाजे मृदंग

रंग अबीर
गुलाल लाल लाल
मचा धमाल

भई पलाश
रंग गई मनवा
अबकी होरी


मन रसना
रंग भरे सपने
नैन बसना

रंग लगाऊँ
पलाश बोरी घोरी
अबकी होरी

भव सागर
पार करो श्यामा
भरो गागर

प्रीत चढ़ाऊँ
संग श्यामा के नाचूँ
फागवा गाऊँ

मन मोहन
मैं बांस की बांसुरी
उर आनंद

रंगी गुलाबी
ओढ़ी प्रीत पिया  की
खिला जीवन


बरस रहा
बादलों से फागुन
शुभ सगुन

गावन गुण
बरसता  फागुन
सरस मन  

05 February, 2014

मदमाया है अब बसंत ........!!


मन ने उमंग भरी ,तूलिका ने भरे रंग,
कोयलिया कूक रही ,बाजे है मन मृदंग ||

फूलों की चिटकन है ,रंगों की छिटकन है,
भँवरे की गुंजन है, छाया जो रंजन है !!

धूप में निखार आया रंग की बहार छाई ,
अमुआ की मंजरिया  देखो कैसी बौराई !!


पीत वसना धरती है ,धरती जो पीत वसन ,
धरती से अम्बर तक आया है अब बसंत !!

कंचन सी धूप खिली छाया है अब बसंत !!
सतरंगी चूनर, लहराया है अब बसंत
छाया है अब बसंत ....!!

राग है बहार संग मनवा है यूं मगन !
छेड़ो अब तान कोई ,लागी कैसी लगन,

प्रकृती में बिखरा चहुं ओर उन्माद है ,
हरस रही सरसों है प्रीति का आह्लाद है,

रंग है बहार है रूप का श्रृंगार है ,
खिलती हुई कलियों पर आया जो निखार है ...!!


सतरंगी ...पुष्पों  पर छाया है अब बसंत
मदमाती सुरभि लहराया  है अब बसंत ......!!

रोम रोम  पुलकित  ,मदमाया है अब बसंत ........!!