नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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05 March, 2015

यूं ही अनवरत .....!!

15 वर्ष यकीनन बहुत लंबा समय होता है ...किन्तु सब कुछ आज भी याद है ...स्पष्ट ...!!
माँ की याद में ...आज उनकी पुण्यतिथि पर ,उनके लिए लिखे कुछ भाव ...!!


मेरे पास आज भी
 तुम्हारे दिये हुए
देखो वही शब्द हैं माँ
वही भाव हैं ...
जिन्हें तुम सर्दी में सहेजती थीं 
धूप दिखाकर ....,
गर्मी में सहेजती थी 
उस अंधेरी कोठरी  में 
धूप से बचा कर ....
बरसात मे  तुम्ही ने सिखाई बनाना 
वो कागज़ की नाव ,
जिस पर आज भी 
तिरते हैं मेरे मन के भाव
''वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का पानी '' 
गाते हुए ....जानती हूँ ....
मानती भी हूँ .......
तुम से मुझ तक ...
मुझ से मेरी संतति तक ....
कुछ तो है जो चलता रहेगा ....
यूं ही अनवरत .....!!

31 December, 2014

चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!

शब्द अपने कितने स्वरूपों में
अवतरित ,
खटखटाते हैं 
मन चेतन द्वार ,
लिए निष्ठा अपार ,
झीरी से फिर चली आती है
धरा के प्राचीर पर
रक्तिम .....
पलाश वन सी .... 
रश्मि  की कतार
नवल वर्ष  प्रबल  विश्वास
सजग  है मन
रचने नैसर्गिक उल्लास,
हँसते मुसकुराते से
 भीति चित्र ,
प्रभात का स्वर्णिम  उत्कर्ष,
शबनमी वर्णिका का स्पर्श ,
एक विस्तृत आकाश का विस्तार ,
बाहें पसार ...
चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!
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आप सभी को नव वर्ष 2015 की अनेक अनेक मंगलकामनाएं !!सभी के लिए यह वर्ष शुभ हो ऐसी प्रभु से प्रार्थना है !!

18 August, 2014

हे कृष्ण कृष्णा.....!!





हे कृष्ण कृष्णा,
नेक सम्हालो  मेरी तृष्णा,
विभूषित प्रमुदित मन करो,
अभिनीत हृदय वीणा को स्वरों  का
अलंकार दो,
संवेदना का जीवन में
संचार दो ,
इक बूंद गिरे
मुझ चातक का,
सोया जीवन
 झंकार दो ....!!



19 September, 2013

ज़िंदगी मुस्कुराने लगी ...!!

रात  ढली   और ....
सुबह कुछ इस तरह  होने लगी ....!!

गुलमोहर  से रंग झरे ...……
सूरज ऐसा रोशन हुआ ...
कि मोम भी पिघलने लगी ...

आम्र की मंजरी पर बैठी कोयल ...
पिया का पतियाँ  लाई .....
कूक कूक
राग वृन्दावनी  सारंग सुनाने लगी ...

भरी दोपहर याद पिया की ..
बिजनैया जो डुराने लगी ...
कूजती रही  कोयल ...
हूक जिया की,
पल पल जाने लगी ...
निरभ्र  आसमान में ,
चहकते विहग ....
जैसे ज़िंदगी मुस्कुराने लगी ...!!

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वृन्दावनी सारंग दिन में गाए जाने वाला राग है …!!
बिजनैया -पंखा
डुराए -झुलाना .