नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!
नमष्कार..!!!आपका स्वागत है ....!!!
Showing posts with label . आध्यात्म. Show all posts
Showing posts with label . आध्यात्म. Show all posts

06 September, 2014

तुम्हारे मेरे बीच की कड़ी

तुम्हारे मेरे बीच की कड़ी
सिर्फ एहसास ही नहीं है,
सिर्फ शब्द ही नहीं है,
सिर्फ प्रेम ,ईर्ष्या ,द्वेष या
सिर्फ  आक्रोश  भी नहीं है
बल्कि संकुलता से  परे ,
तुम्हारा वो सशक्त मौन है ,
मेरे चारों तरफ ,
जो तुम्हारे होने का प्रमाण  देता है
अपनी ऊर्जस्वितता में,

और बांधे रखता है सदा ,
दुख सुख में ,
हमे इस अटूट  बंधन में...!!

30 May, 2014

राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!




Ignite the lamp of my heart ....my soul .....!!O Lord .....don't let my prayers go unheard ....!!just hold me before I fall ......!!

राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!
कोयल की कूक में कामना,
मोरी प्रीत का सेतु प्रार्थना ,
आरत का सेतु अराधना
साधक का सेतु साधना
श्याम  तुम तक पहुँचूं  कैसे  .... ?
मीरा की पीर झरे झरना ,
मन की हूक रचे रचना
राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!

24 December, 2013

निर्बल को भी बल देता है प्रेम



या होता है
या  नहीं ही होता,
पूर्ण खिलकर
पुष्पित होता है !!
एक रूप एक रंग
अद्वैत सम
शाश्वत सत्य है प्रेम
बुद्धि को समृद्ध करे
जीव को अलंकृत करे
जीवन को सुरक्षित करे
आत्मा  को सुरभित करे …!!

मोल नहीं है इसका
कोई तोल नहीं है इसका
मौन होकर भी मुखर

अदृश्य होकर भी दृष्टोगोचर
लुकता नहीं है ,छिपता नहीं है ,
झुकता नहीं है प्रेम
गौरव से मस्तक है ऊँचा
ईश्वर के समरूप है सच्चा
निर्बल को भी बल देता है प्रेम ...............!!


04 December, 2013

भेद अभेद ही रह जाये ...!!

विस्मृत नहीं होती छवि
पुनः प्रकाशवान रवि
एक स्मृति है
सुख की अनुभूति है ....!!
स्वप्न की पृष्ठभूमि में
प्रखर हुआ  जीवन ...!!
कनक प्रभात उदय हुई
कंचन   मन आरोचन .........!!

अतीत एक आशातीत  स्वप्न सा प्रतीत होता है

पीत कमल सा खिलता
निसर्ग की रग-रग  में रचा बसा
वो  शाश्वत प्रेम का सत्य
उत्स संजात(उत्पन्न) करता
अंतस भाव  सृजित  करता
प्रभाव तरंगित करता  है ..!!
.
तब शब्दों में  …
प्रकृति की प्रेम पातियाँ झर झर झरें
मन  ले उड़ान उड़े
जब स्वप्न कमल
प्रभास से पंखुड़ी-पंखुड़ी खिलें  ......!!

स्वप्न में खोयी सी
किस विध समझूँ
कौन समझाये
एक हिस्सा जीवन का
एक किस्सा मेरे मन का
स्वप्न जीवन है या
जीवन ही स्वप्न है
कौन बतलाए ....?
भेद अभेद ही रह  जाये ...!!

04 July, 2013

चंपई गुलाबी पंखुड़ी पर ...


स्मित  बनफूलों का
सौम्य तारुण्य ...!!
चंपई गुलाबी  पंखुड़ी पर ...
चाँदनी  का
चांदी सा छाया लावण्य ...!!
भीनी भीनी सी खुशबू  ले .....
बहती हुई ये अलमस्त पवन ...
बूंद बूंद बरस रहा है ...
मेघा का रस पावन ...

स्निग्ध  चांदनी में डूबा
कल्पनातीत वैभव ....
सरसता  हुआ मन ...!!
रुका  हुआ क्षण ...!!
अनिमेष सुषमा का ,
कर रहा रसास्वादन .....!!!!

अंबर की  रस फुहार ....
हो रही बार-बार ....
बरस रहा आसाढ़ ......
भीग रहा मन चेतन ...!!

कैसी अनुभूति है ...??
छुपी कोई अदृश्य आकृति है ....???
कौन है यहाँ
जो मुझे रोक लेता है ...????
नमन करने तुम्हारी कृति पर ...
और ...अपनी सीली सीली सी ...
मदमस्त सुरभि से ...
तुम्हारी उपस्थिति का भान कराता है ...

मेरे  ह्रदय के आरव   श्रृंगों  को .....
भिगोने लगता  है
वाणी के उजास  से ......
चेतना आप्लावित  होती है
अंतस तक ....!!
और इस तरह
तुम ही करते हो ....
मेरा मार्ग प्रदर्शन ....
और प्रशस्त  भी ....!!




14 March, 2013

अब मन छायो बसंत .......!!!!!!

किसलय अनुभूति देती .....
सागर सी ...
सुनील तरंग ...
सुशील उमंग ..!!!!

रंग भर भर ...  झर-झर निर्झर बहें....!
निसर्ग  झूम झूम गाए...
सुमंगल  स्वस्तिवाचन ....!!!!!


हुआ स्वर्ग सा  विस्तार  नयनाभिराम ...
सुलक्षण सुमन  ..सुविकसित सुवास ....
खिली खिली धरा ...
पा गई  ....सुनिधि सुहास ....!!!!

सुपर्ण सुनियोजित ....
प्रभास अनंत 


अहा ...आयो बसंत ....
मन भायो बसंत ....










अब मन छायो बसंत ...

11 February, 2013

निर्मल निर्लेप नीला आकाश ...

निर्मल निर्लेप नील आकाश ...
देता है वो विस्तार .....
कि तरंगित हो जाती है कल्पना ...
 नाद सी.......हो साकार ....

अकस्मात  जब ढक लेते हैं  बादल ...
नीलांबर  का वो नयनाभिराम  सौन्दर्य .....
गुण को गुणातीत ...
तत्व को तत्वातीत......
अगम्य को गम्य कर त्वरित गति  देती हैं ...
मन की अनहद उन्माद तरंगें ...!!


मूक सर्जना  मुखरित हो  उठती है .....
पंगु शब्द भी -
कविता में नृत्य करते  है ...
हृदय  तरंगित हो ......
अनहद सा जाता है ...उस पार .......
 हे  प्रभु  ...तुम्हारे पास .....!!


अक्षर के अक्षत चढ़ाऊँ  ....
ज्ञान दो विस्तार पाऊँ ....
सुकृत  हो जाऊँ.....
तुम्हारा रूप ....मेरे आखर ....

निर्मल निर्लेप नील आकाश ...
देता है वो विस्तार .....
कि तरंगित हो जाती है कल्पना ...
हो साकार ....

**********************************************
 नाद -नाद के दो प्रकार होते हैं ....
1-आहत नाद वह नाद है जो कानो को सुनाई देता है |
2-अनाहत या अनहद नाद वो नाद है  , जो नाद केवल अनुभव से जाना जाए ....या जिसके उत्पन्न होने का कोई खास कारण न हो ,यानि जो बिना संघर्ष के स्वयंभू रूप से उत्पन्न होता है ,उसे अनहद नाद कहते हैं ...!!



Can I see YOU with the eyes that I have ...?
Can I pray to YOU with the hands that I have ....?
Can I worship YOU with the mind that I have ...?
I know not much .....in fact nothing ....!!O GOD .....!!
Hold me and behold me as I tread THE PATH ...IN PURSUIT OF EXCELLENCE ...towards YOU ...THE OMNIPOTENT ...AND THE OMNIPRESENT ......!!!!!!