नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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09 April, 2021

सखी फिर बसंत आया है


 किसलय की आहट है 

रँग की फगुनाहट है 

प्रकृति की रचना का 

हो रहा अब स्वागत है 


मन मयूर थिरक उठा 

आम भी बौराया है 

चिड़ियों ने चहक चहक 

राग कोई गाया है 


जाग उठी कल्पना 

लेती अंगड़ाई है 

नीम की निम्बोड़ि भी 

फिर से इठलाई है 


कोयल ने कुहुक कुहक 

संदेसा सुनाया है 

अठखेलियों में सृष्टि के 

रँग मदमाया है 


सखी फिर बसंत आया है 


अनुपमा त्रिपाठी

  "सुकृति"

14 March, 2013

अब मन छायो बसंत .......!!!!!!

किसलय अनुभूति देती .....
सागर सी ...
सुनील तरंग ...
सुशील उमंग ..!!!!

रंग भर भर ...  झर-झर निर्झर बहें....!
निसर्ग  झूम झूम गाए...
सुमंगल  स्वस्तिवाचन ....!!!!!


हुआ स्वर्ग सा  विस्तार  नयनाभिराम ...
सुलक्षण सुमन  ..सुविकसित सुवास ....
खिली खिली धरा ...
पा गई  ....सुनिधि सुहास ....!!!!

सुपर्ण सुनियोजित ....
प्रभास अनंत 


अहा ...आयो बसंत ....
मन भायो बसंत ....










अब मन छायो बसंत ...

17 February, 2013

ए री ,बसंत आया .....!!!

आभार मीनाक्षी ...
चटकी कलियाँ ......
फूली बेला चमेली ...

बनन में....
बागन में बगरो बसंत ...
बिखरे अनगिन रंग ....
ज्यों रूप अनंग ....

रोम-रोम हर्षाया....
सुभग सलोना सा ...
कैसा बसंत छाया ....
नवल उल्लास अंगना  आया ...


पुष्प गुच्छ लद गए ....
......राग -रंग खिल गए ...
श्वेत 'श्याम- रंग'  नीले नीले ...
बैगनी  गुलाबी .....
'प्रीत-रंग' पीले पीले ....


कुछ टप टप गिरती बूंदों से ....
धरा धुल गई ........खिल गई ...
...साँवली संकुचाई सृष्टि की रंगभरी........
...प्रभामई आभा भई....

सिकुड़े सिमटे शब्दों की ...
प्रेम भरी बाहें फैल गईं ......

असीम अनंत सुख की ....
सुरभि चहुं दिस बिखर गई ...


सजन रूप मन भाया ...
भरमाया .........
ए री  ,बसंत आया .....!!!

14 February, 2013

मैं बसंत ....फिर आया हूँ .....!!



पीत  रंग भरा  अनुराग  ...
सरसों के खेतों में...सरस ....
हरख हरख लहराया हूँ ...

हरियाली टहनी   की फुनगी पर झूम कर ....
सुर्ख लाल लाल ...टेसू सा .........!!


छुपा हुआ इन्हीं रंगों में....
कुछ भावों सा ...
कुछ शब्दों सा ......

जीवन का प्रेमी मैं .....बसंत .....
अमुवा की मंजरी   पर बौराया हूँ ....!!



बसंती हवा के संग सदा  .......
गाता गुन गुनाता ....

आज मैं  तुम्हारे द्वार  फिर ....
राग बसंत लाया हूँ ...


मदमाती सुरभि की सवारी ...
मैं  बसंत ....फिर आया हूँ .....!!