सरसों के खेतों में...सरस ....
हरख हरख लहराया हूँ ...
हरियाली टहनी की फुनगी पर झूम कर ....
सुर्ख लाल लाल ...टेसू सा .........!!छुपा हुआ इन्हीं रंगों में....
कुछ भावों सा ...
कुछ शब्दों सा ......
जीवन का प्रेमी मैं .....बसंत .....
अमुवा की मंजरी पर बौराया हूँ ....!!
बसंती हवा के संग सदा .......
गाता गुन गुनाता ....
आज मैं तुम्हारे द्वार फिर ....
राग बसंत लाया हूँ ...
मदमाती सुरभि की सवारी ...
मैं बसंत ....फिर आया हूँ .....!!

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