नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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14 February, 2013

मैं बसंत ....फिर आया हूँ .....!!



पीत  रंग भरा  अनुराग  ...
सरसों के खेतों में...सरस ....
हरख हरख लहराया हूँ ...

हरियाली टहनी   की फुनगी पर झूम कर ....
सुर्ख लाल लाल ...टेसू सा .........!!


छुपा हुआ इन्हीं रंगों में....
कुछ भावों सा ...
कुछ शब्दों सा ......

जीवन का प्रेमी मैं .....बसंत .....
अमुवा की मंजरी   पर बौराया हूँ ....!!



बसंती हवा के संग सदा  .......
गाता गुन गुनाता ....

आज मैं  तुम्हारे द्वार  फिर ....
राग बसंत लाया हूँ ...


मदमाती सुरभि की सवारी ...
मैं  बसंत ....फिर आया हूँ .....!!




08 December, 2012

धार बनी नदिया की .......

नदी की यात्रा ....समुद्र की ओर .....आत्मा की यात्रा, परमात्मा की ओर ....इसी भाव से पढ़िये ....धार बनी नदिया की ......


छवि मन भावे ...
नयन   समावे ..
सूरतिया पिया की ...

बन बन .. ढूँढूँ ..
घन बन  बिचरूं .....
धार बनी नदिया की .......


कठिन पंथ ...
ऋतु  भी अलबेली ....
बिरहा मोहे सतावे ...

पीर घनेरी ...
जिया नहीं बस में ...
झर झर झर अकुलावे .....


 विपिन घने ,
मैं कित मुड़ जाऊँ ...
कौन जो राह सुझावे .....?

डगर चलत नित
 बढ़ती हूँ........
 निज वेग मोहे हुलसावे ...

अब..कौन गाँव  है ....
कौन देस है ..
कौन नगरिया  पिया की ....


बन बन .. ढूँढूँ ..
घन बन  बिचरूं ...
धार बनी नदिया की .......


धार बनी नदिया की ....!!

मैं इक पल रुक ना पाऊँ....
मैं  कल  कल बहती छल छल बहती .....
बहती बहती जाऊँ....!!!!!!

I know not much .....in fact nothing ....!!O GOD .....!!Hold me and behold me as I tread THE PATH ...IN PURSUIT OF EXCELLENCE ...towards YOU ...THE OMNIPOTENT ...AND THE OMNIPRESENT ......!!!!!!



06 October, 2012

श्यामल यवनिका उठ चली ..

श्यामल यवनिका उठ चली ..




 


 प्राची पट खोल रही  ...

श्यामल यवनिका उठ चली ..
 जागी उषा की स्वर्णिम लाली ...
नभ नवल नील मस्तक सजाती ....  ....
 मुस्काती .. आशा की लाली ...!!
छलकाती नवरस की प्याली .....!!



कुछ अनहद नाद सी श्रुति ....
अमर भावना सी लगी ...
अद्भुत भोर हुई ...!!




मंगलाचरण  गाते विहग ....
दूर क्षितिज पर  ....
रेखा सी कतार कहीं ...
कहीं भरते छोटी सी उड़ान ...!!
सभी का  स्मित विहान.......!!
नील नवल वितान ...
खिल रहा आसमान ....!!
छा जाती मन पर......वो आकृति ...
जो देती नहीं दिखाई ....पर देती है सुनाई ...




ॐ सा ओंकार सुनाते ....

मंगलाचरण गाते विहगों की ....
अनहद नाद सी मन दस्तक देने आई ....
आई ...मन भाई ......
नभ मुख मण्डल..
अरुणिमा  छाई ...
 ....अब ले अंगड़ाई ...
पुनि भोर भई  ....!!  ...
अद्भुत भोर भई ....



02 October, 2012

टिमटिमाता हुआ ... एक दिया ..

जीवन की काल कोठरी में  ....
मन की काल कोठारी में ....
कुछ प्रकाश तो था ...
क्षीण   होती आशाओं में ....
फिर भी विकीर्ण होता हुआ ..
कुछ उजास तो था ...!!

उठता है सतत ...
जो धुंआ इस लौ से ..
स्वयं की भीती से-
स्वयं ही लड़ता....
प्रज्ज्वल ..कांतिमय ..
भय से निर्भीक होता हुआ..
भोर के विश्वास का प्रभास देता हुआ .....
शंका का विनाश करता हुआ ..
सत्य की टिमटिमाती सी लौ ....
प्रकाश पुंज अविनाशी ....!!

उच्छ्वास  को उल्लास में बदलता हुआ ...

नित नवल नूतन विभास
 प्रस्फुटित करता  हुआ ..
टिमटिमाता था ..
स्वयं जलकर भी ...
प्रकाश ही देता था ..
छोटी सी लौ ...आरत ह्रदय .. .....
जलता हुआ ..टिमटिमाता हुआ ...एक दिया ..




एक विश्वास है मन में .......आस्था है ....बापू ....इस  नव भारत में ,इस भारती में  .....कुछ सत्य  अभी बाकी है ..........!!!!!!!!!और उसी पर अडिग अविचल अपनी सभ्यता संस्कृति से जुड़े रहकर ही हम कर रहे हैं नव भारत का निर्माण ....!!!!!!!
जय हिन्द ।




आइये बापू को ,शास्त्री जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए ये गीत सुनते हैं .......................................