नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!
नमष्कार..!!!आपका स्वागत है ....!!!
Showing posts with label आभास. Show all posts
Showing posts with label आभास. Show all posts

05 April, 2013

अनुभुति की सुकृति ....!!

अनुभूति ...से अनुभूत ...
अनुभूति से अनुरंजित ...
अनुभूति के अनुकूल ...
अनुभूति  से अनुरक्त ...
अनुभूति  से अभिभूत ...
अनुभूति का अनुनेह ...
अनुभूति की अनुगूंज ...
अनुभूति  की अनुशंसा ...
अनुभूति  की अनुकृति ...
ऐसे ही बह चली ....
अनुभुति से सुकृति...
अनुभूति  की सुकृति ....



मेरे ब्लॉग की आज तीसरी वर्षगाँठ .....
इसी प्रकार आनंदमई यात्रा चलती रहे .....
आप सभी से सौहार्द्र अपेक्षित .....
सादर आभार ....!!

02 October, 2012

टिमटिमाता हुआ ... एक दिया ..

जीवन की काल कोठरी में  ....
मन की काल कोठारी में ....
कुछ प्रकाश तो था ...
क्षीण   होती आशाओं में ....
फिर भी विकीर्ण होता हुआ ..
कुछ उजास तो था ...!!

उठता है सतत ...
जो धुंआ इस लौ से ..
स्वयं की भीती से-
स्वयं ही लड़ता....
प्रज्ज्वल ..कांतिमय ..
भय से निर्भीक होता हुआ..
भोर के विश्वास का प्रभास देता हुआ .....
शंका का विनाश करता हुआ ..
सत्य की टिमटिमाती सी लौ ....
प्रकाश पुंज अविनाशी ....!!

उच्छ्वास  को उल्लास में बदलता हुआ ...

नित नवल नूतन विभास
 प्रस्फुटित करता  हुआ ..
टिमटिमाता था ..
स्वयं जलकर भी ...
प्रकाश ही देता था ..
छोटी सी लौ ...आरत ह्रदय .. .....
जलता हुआ ..टिमटिमाता हुआ ...एक दिया ..




एक विश्वास है मन में .......आस्था है ....बापू ....इस  नव भारत में ,इस भारती में  .....कुछ सत्य  अभी बाकी है ..........!!!!!!!!!और उसी पर अडिग अविचल अपनी सभ्यता संस्कृति से जुड़े रहकर ही हम कर रहे हैं नव भारत का निर्माण ....!!!!!!!
जय हिन्द ।




आइये बापू को ,शास्त्री जी को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए ये गीत सुनते हैं .......................................


21 September, 2012

लड़ी...बूंदो की ...

लड़ी...बूंदो की ...
झड़ी ..सावन की ...
घड़ी  ....बिरहा की ... 
बात ..मनभावन की ...
रात ...सुधि आवन की .....
सौगात ......... नीर  बहावन की ......!!

18 March, 2012

जीवन के साक्षी ....

दुर्भेद्य तम  को चीरती ...
उषा की पहली किरण ...
स्वर्णिम सी .....


नीरव एकांत में ,
जिंदगी  की आहट ...
झीगुर की आवाज़ ....
एक सांस सी ...

तृषा से व्याकुल ह्रदय ...
पा गया है ...
बस एक बूँद ,,,
स्वाति की ओस  सी ...

क्रोधाग्नि पर बरसती झमाझम ....
बस एक मुस्कान ...
ठंडक सी ...

वृहद् अरण्य पर भटकती रूह ...
मिल गयी मंजिल ...
एक डगर सी ....

डूब के  इस कोलाहल में भी ......
मेरी अनुभूति ....
एक दिव्य मौन सी ...!!

देती है प्रतीति ....
प्रत्येक क्षण में ..कण कण में ...
जीवन के साक्षी ....
तुम्हारे होने के ......
एक आभास सी ......