नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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06 October, 2012

श्यामल यवनिका उठ चली ..

श्यामल यवनिका उठ चली ..




 


 प्राची पट खोल रही  ...

श्यामल यवनिका उठ चली ..
 जागी उषा की स्वर्णिम लाली ...
नभ नवल नील मस्तक सजाती ....  ....
 मुस्काती .. आशा की लाली ...!!
छलकाती नवरस की प्याली .....!!



कुछ अनहद नाद सी श्रुति ....
अमर भावना सी लगी ...
अद्भुत भोर हुई ...!!




मंगलाचरण  गाते विहग ....
दूर क्षितिज पर  ....
रेखा सी कतार कहीं ...
कहीं भरते छोटी सी उड़ान ...!!
सभी का  स्मित विहान.......!!
नील नवल वितान ...
खिल रहा आसमान ....!!
छा जाती मन पर......वो आकृति ...
जो देती नहीं दिखाई ....पर देती है सुनाई ...




ॐ सा ओंकार सुनाते ....

मंगलाचरण गाते विहगों की ....
अनहद नाद सी मन दस्तक देने आई ....
आई ...मन भाई ......
नभ मुख मण्डल..
अरुणिमा  छाई ...
 ....अब ले अंगड़ाई ...
पुनि भोर भई  ....!!  ...
अद्भुत भोर भई ....



20 July, 2012

श्याम भजन ....

वैसे तो गीत को स्वर देना एक अलग ही विधा है ..!कभी इससे  पहले कोशिश नहीं की थी किसी गीत को स्वर देना की ...पर आज समझ मे आया प्रोत्साहन क्या होता हैऔर क्या कुछ कर सकता है .. ...!मुझे कभी विश्वास नहीं था मैं कर पाउँगी पर आप सभी के कहने पर ही आज मैंने  अपने  लिखे एक श्याम भजन ..रीत रही मोरी प्रीत .....को स्वर्बद्ध किया और स्वयम ही इसे संगीत्बद्ध   भी किया  है ...!!इसका छायांकन  भी मेरी ही कोशिश है  ...मेरे जीवन की एक श्रेष्मठतम  उपलब्द्धी है ये ...!और श्रेय जाता है ...आप सभी को ....
मधुरेश ,सलिल जी ,मनोज जी,अशीष जी ,प्रवीण जी ,यशवंत ,मुकेश ,अरविंद जी ,संगीता दी अनमिका जी ,अनु,दिगम्बर नासवा जी,रमाकांत जी ,शिखा जी,रश्मी दी ,अमृता जी,बाबुषा ,धीरेंद्र जी ,सतीश जी, शास्त्री जी,रविकर जी ,ललित जी ,शिवम ,अभि,वीरुभई जी ,संजय भास्कर जी ,हिमांशु जी ,...
समय समय पर आप सभी मुझे बहुत प्रोत्साहित करते रहे हैं कि मैं अपनी  रचना स्वयम स्वर बद्ध  करूं.....वैसे तो और भी बहुत नाम हैं लिखती जाउँ तो उसी से पोस्ट भर जायेगी ......

आप सभी का स्नेह और आशिर्वाद भरपूर  मिला है ....तभी  ये प्रभु कृपा भी हुई है ...लीजीये ये विरह गीत सुनिये .....



14 July, 2012

भुवन की मैं हूँ नीली सी धरा ....

ओ पथिक ...
क्या ज्ञान है .......कौन हो तुम ....?
कहाँ से आये हो..?
माया में  ...क्यों इतना भरमाये हो ...?
किस बात की शीघ्रता  है ...?
कुछ साथ नहीं जायेगा ...
मुझ माटी में  ही तो मिलना है ...
अरे ...रुको ......रुको ...
सुनो तो ....
माटी में मिलने से पहले ..
माटी को ही  कुछ दान देते जाओ ...
और कुछ नहीं ..
बस ...थोड़ा सा मान देते जाओ ...

रंग दो मुझे इस सावन हरा ...
पंच तत्व से बनी ...
भुवन की मैं हूँ नीली सी धरा ....


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अगर सम्भव हो इस वर्ष कुछ वृक्ष ज़रूर लगायें........!!!

05 July, 2012

बरस भी जाओ ...!!

तुम बिसर गये...
मैं राह तकूँ ...

तुम क्यों रूठे ...
मैं न जानूँ ...

तुम हृदय हीन ...
मैं न मानूँ ...

 कैसी है ये लगन ...
तृषित मन ...
तिड़क तिड़क ..
खुष्क नयन ...
बाट तके ....
अब नेह बरसाओ ....
ओ सजन .. ...बरस भी जाओ ...!!

26 June, 2012

बूंद बूंद स्वाति बरस... .. क्षुधा मिटाऊँ....मैं तर जाऊँ ...!!

Pied cuckoo...



चातक की प्यास लिये ...
साध ..रे मन साध ....साध ...!!
स्वाति की आस लिये ...
ताक रहा है आसमान ...!!

रे मन ..कोमल रिशब (रे)...साध रहा ...
देख देख घनघोर  घटा ....
पावन मधु रस  तरस रहा ...


आरत  सी भावना  लिये ...
अनुराग की साधना लिये  .....
स्वाति...स्वाति ....अब बरसो ...भी ..
श्रुति दीप  अर्चन लिये ...
कुछ बह सा  रहा है मन ...
हृदय के तार झंकृत कर ..
अनहद नाद सा ...
चातक की प्यास लिये ...
स्वाति की आस लिये ...
ताक रहा है आसमान ...



कुछ कह सा रहा है मन ....!!

अब करता  मनुहार ...
री बूंद बरस जा मोरे  मन द्वार ..
गंगा ना जानुँ  ...जमुना ना जानुँ ...
नित घट-घट  बिचरन नाहिं जानुँ ...
रे निर्मल जल .....
प्रेम रस ....
बूंद बूंद स्वाति बरस.....
हृद सील  तोष  पाउँ ...
क्षुधा मिटाऊँ....मैं तर जाऊँ ...!!
मैं तर जाऊँ ...!!

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प्रभु लीला का एक अद्भुत उदाहरण .....

चातक का स्वर रिशब(रे) होता है ऐसा संगीत शास्त्रों मे कहा गया है |और चतक सिर्फ वर्षा का जल पी कर ही अपनी प्यास बुझाता है अन्य पानी पीता  ही नहीं |पूरे साल वर्षा की बाट जोहता है ....!!स्वाति नक्षत्र मे जब वर्षा पड़ती है ....चोंच  खोल वही पानी पीता है ........बस मनो अमृत ही गृहण करता  है ....

23 June, 2012

मैं किस बिध तुमको पाऊँ प्रभु..?

मैं किस बिध तुमको  पाऊँ प्रभु..?

अब अखियन  नीर बहाऊँ प्रभु ...
पग धरो श्याम मत बेर करो ...
मन मंदरवा   सुधि-छाप धरो..
अब  अंसुअन पांव पखारूँ प्रभु ...

मैं किस बिध तुमको  पाऊँ प्रभु..?

मन का इकतारा बाज रहा ..
सुर बिरहा  आकुल साज रहा ...

तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ....!
मेरे हिरदय मधु  प्रीत पली ...
तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ...
निज  प्राण पखेरू निकसत हैं ...
मन सुमिरत वंदन गावत है ...
तरसत मन  अब हरि दरसन दो ....
हरो पीर मेरी ...तर जाऊँ प्रभु ...!!

मैं किस बिध तुमको  पाऊँ प्रभु..?

08 May, 2012

अनंत...अंतहीन यात्रा मेरी ........!!

गुलमोहर की छाँव

दूर ..सुदूर पहाड़ी पर ...
मेरा मन मंदिर ...
दिखता है तुम्हारा 
आलीशान  मंदिर .....
चढ़ रही हूँ ....
लीन तुम में ...
एकाग्रचित्त ....!!
सुरों की माला जपती ...
कितने सुंदर रस्ते से -
गुज़र रही हूँ मैं .......!!
राह पर भरे   हुए ..
झरे हुए  गुलमोहर....!!
बन बन भरे हुए लाल-लाल  ...
जलते हुए ..पलाश ...!!


अमलतास के झूले ....मन झूम-झूम झूले ...
झूलते पीले-पीले अमलतास  ........
चमेली की महक से ..
भरता जाता मन ..!!
गुनगुनाता ...
खुशबू  लुटाता ..
सुरों का सम्मोहन ......!!
पराग के अनुराग  से 
लदा -लदा  हरसिंगार ...
हरसिंगार .....प्रभु चरणों में ...
भर-भर  अंजुरी उड़ाती  चलूँ ...
मन  बसंत   बहार ....!!
प्रभु ...तुम हो साथ मेरे ...
और चल रही है ...
अनंत...अंतहीन यात्रा मेरी ....!!




अथक परिश्रम ....
टप टप गिरतीं हैं पसीने की बूँदें ....
कैसा आश्चर्य है ...
जितना चलती हूँ .......
हलकी होती जाती हूँ ...
ऊर्जा बढ़ती जाती है ...
जिजीविषा मुस्काती जाती है ...
उड़ने सी लगती हूँ ....
झूमने सी लगती हूँ ...
खिलता जाता है ...कोमल ..
मन का नील  कमल ...!!
खिलता सरोज .....माँ  जैसा ...!!
प्रभु ...तुम हो साथ मेरे ...
और चल रही है ...
अनंत..अंतहीन यात्रा मेरी ....!!


इस अनुनेह में ....
अनुपम  अनुभूति है ....
शंख नाद सी ...
अनुगूंज उस अनुनाद की ..
सतत ही  वो नाद सुनना ....!
मेरा मन  भी गूंजता है ...
तानपुरे की उसी नाद से ....!
नित-नित मेरा ह्रदय झंकृत करता हुआ ...!!
सुर अलंकृत करता हुआ ....!!
प्रभु ...तुम हो साथ मेरे और ...
चल रही है ...
अनंत...अंतहीन यात्रा मेरी .....!!


जीवन  की इस धूप-छाँव में ...
जीवन में धूप भी..छाँव भी ....
अनेक रूप में ,
मंदिर की घंटी,
चर्च की चाइम या,
मस्जिद  की अजान हो-
आँख बंद करके जब सुनती हूँ,
सुरों में छुपे सेदिखतेहो..
प्रभु हर पल मेरे साथ ,ब्रह्म स्वरुप -नाद में,
अनेकों रागों के प्रारूप में,
स्तब्ध हूँ ...चाहे चंद्रकौंस हो  ...या गोरख कल्याण,तृप्त कर देते हो मुझे ....
प्रभु ...तुम हो साथ मेरे और ...चल रही है ..अनंत...अंतहीन यात्रा मेरी .....!!




*चंन्द्रकौंस और गोरख कल्याण -रागों के नाम हैं ....

25 February, 2012

रहे अक्षय मन .....!

हे नाथ ..!हे द्वारकाधीश ...
करो कृपा ..इतना ही दो आशीष ..!!
कई बार व्यथित हो जाता मन ..
नहीं सोच कहीं कुछ पता मन ..
दुःख में ही क्यूँ घबराता मन ...?
है सांस नहीं पल पता मन ...!!
अपने दुःख से ,
घर भर को मैं परेशान करूँ ...!!
मन आहत , कैसे विश्राम करूँ ..?
दुःख  भार स्वयं ही ...
कैसे वहन करूँ ...?
तब ,क्या संभव है ...
नहीं किसी को व्यथित करूँ .....?

क्षय विक्षय से दूर करो ..
बुद्धि विवेक आलोक दो ऐसा ...
स्वाद्ध्याय पर अविचल ..अडिग रहूँ .. ....
न हो संशय स्वजनों पर ....!!

मेरे नैनो पर छाया कैसा आवरण .....
करो क्षोभ हरण ..
हे उज्जवल कान्त ...स्निग्ध प्रशांत ...
हाथ  पकड़  उत्थान  करो  मेरा  ...
तब ..दे दो ऐसी सुर लहरी ...सगुन भक्ति ...
तुममें खो जाऊं ...
तुम्हारा ही गान  गाऊं.....मान  बढाऊं ..


मंजीरा  बाज  उठे  मन  का  ..
 रहूँ मुदित ..प्रमुदित ..जीते हुए ये जीवन ...!!


निर्निमेष ..अनिमेष देख तुम्हें हर पल ही ...
शुभ्र ज्योत्स्ना ..ग्रहण करूँ ..
शुभ्र चेतना का प्रसार हो ...
हो  शुभ जीवन ...चरणामृत  बरसे .....
अमृतमय  आप्लावित रहे ..
...रहे अक्षय मन ...

03 January, 2012

काश ऐसा हो हम सबके लिए नया साल ...!!

         
मृग से चंचल नयन ..
मदमाती चाल ...
मोर से पंख  ...
जीवन से  ऐसी सुरुचि  ..
जो कर दे निहाल .. ...
जैसे  जिजीविषा से भरी ...
नवयौवना का   हाल ...
काश ऐसा हो सबके लिए ये  नया साल ....!!

फूलों से रंग ...
चलो,कुछ-दर्द  ..
थोड़े कांटे भी संग ...
पाखी सी उमंग ...
सुरों सी तरंग ...


आहत-अनाहत सम्मिलित ...
पूजा की घंटी सी नाद ....
मन मंदिर पर इंगित ..
शुभ प्रभु-पाद
गुरु सी प्रवृत्ति ..
शिष्य सी लगन ..
पिता सी दृष्टि ..
माँ सा कर्म रत मन ...
जो कभी न हो बेहाल ...
काश ऐसा हो हम सबके लिए ये नया साल ....!!

सुदूर अनंत तक फैली आशाएं ...
जन्म लेतीं रहें ..प्रबल इच्छाएं ...
माझी का वो सुंदर गीत ...
प्रेम ही प्रेम दे मन मीत ..
मन में न रहे कोई मलाल ...
काश ऐसा हो हम सबके लिए नया साल ...!!

27 December, 2011

नैहरवा हमका न भावे ....!!

कबीर पढ़ना और गाना अपने आप में एक आलौकिक आनंद देता है .....!!उनके भाव गाते वक़्त मैं इस दुनिया में होते हुए भी नहीं होती .....!!


जब ज्योति जलती है ... हमारे बीच  ...प्रेम की ...ज्ञान की ...भक्ति की ...हमारे अंदर ....
जब हम वेद-पुराण की बात करते हैं ....अपनी सभ्यता संस्कृति की बात करते हैं ...अपनी भावनाओं की बात करते हैं ...तो सहज ही ध्यान आता है कबीरदास जी का ...उनके दोहों को पढ़ना और सुनना अपने आप में एक अद्भुत अनुभव है ...!
पहले हम जीवन में भोग और विलास के  पीछे भागते हैं एक अंधी दौड़ में ..जो हमें चाहिए उसके पीछे ....जब वो सब हमें मिल जाता है ...तब एक अजीब से खालीपन का एहसास होता है ...और याद आते हैं वो प्रभु जिन्हें हम अपने व्यस्त जीवन में....भूले- बिसराए बैठे हैं ...प्रभु से एकाकार होने का मन करता है ....और लगता है ...

साईं की नगरी परम अति सुंदर ...
जहाँ कोई जावे  न आवे ...

उस नगरी तक ....उस प्रभु तक मैं अपना संदेस ...कैसे पहुँचाऊँ ...?

बिन सतगुरु आपनो नहीं कोई .....कहत कबीर सुनो भाई साधो ....सपने में प्रीतम आवे ...
जी हाँ अगर गुरु कृपा हो तो रास्ता आसान हो जाता है ....
कबीरदास जी कहते हैं ....

नैहरवा हमका न भावे ....

साईं की नगरी परम अति सुंदर ...अति सुंदर ...
जहाँ कोई जाए न आवै ..
चाँद सूरज जहाँ पवन न पानी ...
को संदेस पहुँचावे ...
दरद यह साईं को सुनावे ...
नैहरवा ....

बिन सतगुरु आपनो नहीं कोई ...
आपनो नहीं कोई ...
जो यह राह बतावे ...
कहत कबीरा सुनो भाई साधो ..
सपने में प्रीतम आवै ...
तपन यह जिया की बुझावे ...
नैहरवा .... 



इस गीत पर अन्य कलाकारों का सहयोग इस प्रकार है ...

हारमोनियम पर -नयन व्यास जी
सिंथ पर हैं -डॉ.मुकुल आचार्य जी
तबले पर -हामित वालिया जी
होस्ट हैं -डॉ पूनम कक्कड़  जी.


24 December, 2011

दीप प्रज्ज्वलन ....!


एक गणेश स्तुति 
व दीप प्रज्ज्वलन का गीत आपको सुना रही हूँ .आशा है आप पसंद करेंगे ....!!

Merry chritmas....!!



दीपो ज्योति परब्रम्ह ,
दीपो ज्योति जनार्दना ,
दीपो हरतु में पाप,
संध्या दीपो नमस्तुते ...

शुभम करोतु कल्याणं ,
आरोग्यं सुख  सम्पदाम ,
मम बुद्धि प्रकाशस्च
दीपो ज्योति नमोस्तुते ... ....!!


26 December, 2010

25-अर्चना -(२०११ के लिए )

नवल -वर्ष की बात नवल हो -
जीवन में सौगात नवल हो -
नवल प्रभा से खिली हो उषा -
गौरव से मस्तक हो ऊँचा -

 सदा कर्मरत रहें हम सभी -
विजय पताका लहराए -
मधुर -सरस सुर गूंजे चाहूं दिस -
अनहद  नाद मन सुन जाए .

नवल स्पर्श हो खुशियों का -
ये गहराता तम हट जाए -
बंसी की  धुन सुन  कृष्णा की -
राधामय मन हो जाए -

प्रेम -पुष्प की सदा हो वर्षा -
सुरभिमय हो सबका जीवन -
यही अर्चना  प्रभु से मेरी    -
स्वीकार करो प्रभु मेरा वंदन......!!!!!


आप सभी को नव-वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ..........!!!!