श्यामल यवनिका उठ चली ..
प्राची पट खोल रही ...
श्यामल यवनिका उठ चली ..
जागी उषा की स्वर्णिम लाली ...
नभ नवल नील मस्तक सजाती .... ....
मुस्काती .. आशा की लाली ...!!
छलकाती नवरस की प्याली .....!!
छलकाती नवरस की प्याली .....!!
कुछ अनहद नाद सी श्रुति ....
अमर भावना सी लगी ...
अद्भुत भोर हुई ...!!
मंगलाचरण गाते विहग ....
दूर क्षितिज पर ....
रेखा सी कतार कहीं ...
कहीं भरते छोटी सी उड़ान ...!!
सभी का स्मित विहान.......!!
नील नवल वितान ...
खिल रहा आसमान ....!!
नील नवल वितान ...
खिल रहा आसमान ....!!
छा जाती मन पर......वो आकृति ...
जो देती नहीं दिखाई ....पर देती है सुनाई ...
ॐ सा ओंकार सुनाते ....
मंगलाचरण गाते विहगों की ....
अनहद नाद सी मन दस्तक देने आई ....
नभ मुख मण्डल..
अरुणिमा छाई ...
....अब ले अंगड़ाई ...
पुनि भोर भई ....!! ...
अद्भुत भोर भई ....
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