रे मन पथिक ..रसिक ..अलबेला ....
झूम-झूम चलता ......
..रस लेता ...
मकरंद मंद-मंद मुस्काता ...
बुनता जाता ताना-बना ...
अद्वैत ..
तीन लोक ..पञ्च तत्व ...सप्त सुर ...नवल रस ...!!
गुन गुन रमता जाता है मस्ताना ...
जग से अनजाना ...
छन-छन ,राग ,अनुराग...
स्वर ...अलंकार .....!!
बढ़ता चल ...करता चल ...
अलंकृत ....विभूषित.....मन को ..
राग से ,अनुराग से ..असंख्य प्रकार ...!!
सृष्टि के सौरभ से ...स्वयं को ....
मन रंग ,रंग ,रंग ले .
सँवर जा भाँति-भाँति ले ....
भर-भर ले ,झर-झर दे ....
...धन-धन भाग सुहाग ...
...रस रंग सुभग सुभाग ......!!
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