नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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04 September, 2012

काग़ज़ की नाव सा ...

नहीं कोई ठाँव सा ....
काग़ज़  की नाव सा ...


बहता हूँ जीवन की नदिया में ...
शनै: शनै: डूबता हुआ  ....
क्षणभंगुर जीवन ...
किंकर क्षणों  मे ही ...
आकण्ठ डूब  जाऊँगा ...
अब तुम पर ..
सब तुम पर है ..
 पार लगाओ ...
मेरा जीवन सुधार दो ....
सँवार दो ..
अरज  बस इतनी ही है ..उद्धार करो ...!!
 हे प्रभु कल्याण करो। .!!

03 July, 2012

छूम छनन नन छन छन ......

आई  ....सावन ऋतु आई ..भरमाई..

सुघड़  नार  सी बलखाई ..बौराई ...इठलाई ...
फिर ...शरमाई ...!!
फिर घूम घूम ..झूम झूम ...घटा छाई ...!!

काहे बुंदियन  बरसन आई ...??
  खिल-खिल लजाई ...

रस   फुहार लाई ...!!
आई आई ....सावन ऋतु आई ...!!

अर र र  ....हंसत ......चलत ....उड़त...
झूम झूम मदमस्त ...बैरी पवन ...
सजनी का डोले-डोले बांवरा मन .....!!

लहर लहर लहराए चुनरिया  ....
पायल संग उड़े उड़े तन ..............
थिरक थिरक  थिरके चितवन ..!!

झूम झूम झन झन ...
छूम छनन नन छन छन ...!!

मनवा तू भी  झूम ले रे ...
तक धिना धिन ... घूम ले रे ...
मुस्कुराले ...संग गा ले ... कुछ क्षण ...!!

बीत जायेगा पल में ....
ये निष्ठुर ..
क्षण भंगुर जीवन ...

मन वीणा के  तार मिला ले .....
कजरी से सुर ताल मिला ले ...
जीवन में अनुराग सजा ले ...!!
मिला तुझे है मानव जीवन ...
रुच रुच इसको भाग जगा ले ....
झूम झूम झन झन ...
छूम छूम छन छन ..
छूम छनन नन छन छन ...!!
छूम छनन नन छन छन ....!!!!!!!

*****************************************************************************************
सर्वप्रथम ....आज गुरु पूर्णिमा पर श्री गुरुवे नम: ....!!


आज से ही मन झूम रहा है ..... कल सावन का पहला दिन .....हरियाला  सावन आया .......
उमंग ...उल्लास ...उत्साह से भरा .....
मन का रंग हरा-हरा ....
प्रभु से प्रार्थना है ....यही रंग ...यही उल्लास ...उमंग से हरा भरा रहे .......आप सभी का जीवन ........
छूम छनन नन छन छन ...!!

25 March, 2012

पूर्णता आस की ........!!


आस जब दूर होती है ...
ह्रदय का नूर होती है ...
पलक  से छलक जाती है ...
निराशा झलक जाती है ...!!
आस जब नैन बसती है ...
.निगाहें राह तकती हैं  ...!!

फिर  जब पास आती है ...
...तो थोड़ा   मुस्कुराती है ...
... आस जब   कंठ सजती है ...
...गुन-गुन  गीत गाती  है ..!!

आस जब साथ उड़ती  है ....
जीवन से प्रीत  होती है .....!!

आस जब जाग जाती है ...
तब ही तो सुबह  होती है ...!!


Glittering ...I see  the spark in your eyes ....!
Hope is bright ...
as bright as the red colour .....
mind's paradigm ......
stretch your hands ......
widen your horizon ....
and ...with a bright hope ....
Go ahead .....
TREAD THE PATH OF LIFE .....IN PURSUIT OF HAPPIENESS .....!!!

20 February, 2012

गुलाबी सा गुलाब ....!!


जीते हुए जीवन ...
सहजता से...सजकता से ..सुघड़ता से ..
जीवन की कठिनाईयों पर ...कामना पर  ...
प्रबलता से ....सबलता से ..सरलता से ..
विजय पाना ...
गुलाब के फूल की तरह ...
घिर कर काँटों से ..
धूप में ..छाँव में इस तरह  खिलना...
कोमलता को ही आत्मसात करना ...
संस्कारों की उर्वरक पाकर ...
मंद मंद मुस्काना ... ......
काँटों से ऊपर उठ जाना ...
सुखद अनुभूति ही देना ...
हे गुलाब ...
आसान नहीं है ... कठिन है ,
तुम्हारी तरह ...मन का ..
गुलाबी सा गुलाब बन जाना ...!!

14 February, 2012

घूँघट में मुखड़ा छिपाए ....

हरी-हरी पतियाँ पीस-पीस,
असुंअन  जल सींच सींच ,
महीन महीन  मेहंदी कर लाये ..
हथेली सजाये ..
हरी-हरी जब
सुर्ख लाल रच जाये ..
ताक ताक  फूली न समाए ..
रूस-रूस रंग देखे ...
हियरा अकुलाये शरमाये....
कजरारे नैना राह तके ..
घूँघट में मुखड़ा छिपाए ....
मंद-मंद डोले मुस्काए ...
हर आहट पर धड़के जियरा  ..
हरी दरस को तरसे जियरा  ...
प्रेम  पिआरी प्रिय दुलारी ...
सजन सों नेहा लगाए ..
धन घड़ी आई ...
बजे  शहनाई ....
सखी ..थर-थर काँपे है जियरा ...
छूटा बाबुल का अंगना ..
क्यूँ बाजे है कंगना ..
चलो  रे ...डोली उठाओ कहार ..
पिया मिलन की ऋतू आई ....!!!!!

10 January, 2012

क्षितिज की तरह ...बहुत दूर हो गयी हूँ मैं ......!

आज सोच में डूबी ..
सोचती हूँ ..क्या हूँ  मैं ...?
जो मैं हूँ वो हूँ ....या ...?
तुम्हारी सोच हूँ मैं ....?

हाँ ... तुम्हारी सोच ही तो  हूँ .......
जब खुश हो तुम...
नीले आसमान पर ..
खूबसूरत रंगों की तरह ...
हंसती मुस्काती ...
तुम्हारे सुंदर भावों की तरह ...
कितनी सुंदर दिखतीं हूँ मैं ...
अपने भाव देखते हो तुम मुझमे ..

क्षितिज ....!!
क्षितिज की तरह.........
हवा सी बहती हुई  ... ....
मन को ख़ुशी देती हुई ... ...

जब जीने लगते हैं..
मुझमे तुम्हारे विचार ..
और  नहीं  चल  पाती  मैं -
 तुम्हारे  अनुसार ......



तब बदल जाते  हो  तुम ..
आसमान पर
बदले हुए रंगों की तरह ...
तस्वीर बदल जाती है मेरी,
तुम्हारे मन में  भी ......
तुम्हारी सोच की तरह बदली  हुई ....!!

अपनी सोच के सांचे में..
अपने मन के ढांचे में ढाला है तुमने मुझे ...
हाँ यथार्थ नहीं ..
तुम्हारी बदली हुई सोच
हो गयी  हूँ मैं अब ....!!
यथार्त में तो ..
मैं जैसी कल थी ...
वैसी ही आज भी हूँ ...
मैं नहीं बदली ...
अब  सोच बदल गयी है तुम्हारी....
इसीलिए ...
अब दृष्टि भी बदल गयी है तुम्हारी ..
तभी  तो  मैं हूँ दूर ...
तुम  से दूर ...!!

अभी भी ..
क्षितिज  की तरह ही ...
हवा सी बहती हुई ...
बहुत दूर हो गयी हूँ मैं ......

01 December, 2011

तो जी लूँ कुछ दिन ...!!

 मैं ...अभी तो ..
 लेने का हिस्सा  हूँ ..
लेती ही रहती हूँ..
जग  से ...!!

जग  में रहकर ...
जग  से हटकर ...
जग  को  देकर ...
कुछ देने का किस्सा बनूँ....
तो जी लूँ कुछ दिन ...!!

अरुण की स्वर्णिम आभा  सी
 निखर  सकूं ..
गुलमोहर  के मोहक  रंगों  सी ..
निखर  सकूँ ..

कल-कल , सरिता के शीतल  जल सी..
 बिखर  सकूँ...
मदमाती, मस्त पवन के  झोंखे सी ..
बिखर सकूं ..

रेगिस्तान में फैली हुई स्वच्छ  रेत सी
बिखर सकूँ ..
नम आँखों में बसते ख्वाबों सी ..
बिखर सकूँ..

सप्त सुरों के सरगम सी ..
निखर सकूँ ...बिखर सकूँ ...
कुमुदिनी की पंखुड़ी सी ..
निखर सकूँ..बिखर सकूँ..


निखर सकूँ ..बिखर सकूँ ..इस तरह तो ......?

 .....तो जी लूँ कुछ दिन ...!!

I know not much.....in fact nothing...............!
O GOD...!!Hold me and behold me as I tread ..THE PATH ...IN PURSUIT OF EXCELLENCE ...towards ...
YOU....THE OMNIPRESENT.....!!!!!!

24 November, 2011

मेरा प्रतिबिम्ब ही है.. जीवन ...!!


जैसा  पानी का रंग है ...
 वैसा मन  का रंग है ...
 और जीवन ..का रंग है ...
 कोई रंग ही नहीं ...
पर दिया अपना रंग मैंने इसे ...
और रंग दिया जीवन अपने ही रंग में ...


या ...
जैसा  गीली माटी का रूप है ....
वैसा मन का रूप है ....
और जीवन का रूप है ...
अपना कोई स्वरूप ही नहीं....
पर चाक पर  दिया -
एक  रूप मैंने इसे ..
और ढाल लिया जीवन..
 अपने मन के स्वरूप में ..


शीश महल की तरह ...
अपनी ही छब दिखाता है ये जीवन ....
विविध रंग-रूप में सिमटा...लिपटा..या फैला ....
मेरा  ही  प्रतिबिम्ब है  जीवन ...
मेरा ही रंग ...मेरा ही रूप ...
मेरी ही दृष्टि ...छाई चाहूं ओर...
चाहूं ओर ..मैं ही  हूँ ..
मेरे ही हर दान से मिला..
 प्रतिदान वरदान.....
हर रोध से मिला..
 अवरोध ..प्रतिरोध...
हर क्रिया  से मिली प्रतिक्रिया ...
और हर बिम्ब से मिला प्रतिबिम्ब ...
हाँ निश्चय ही .....


मेरा  प्रतिबिम्ब ही  है.. जीवन ...!!


Oct.,2011,when I was in U.K ,one of my articles was published in the news paper titled , ''The gift of music .''for  ''Thought of the week.''Please spare a few minutes if u can.Thanks.

07 November, 2011

अब तो बेड़ा पार करो खेवैया ...!!

     प्रभु तुम ..
हो दयाल ..रहो कृपाल ..
यूँ बसो सदा ही ..
मन  में मेरे ...

देख सको अपनी चितवन से  ..
सांझ -सबेरे मुझे जतन से ...
नित मन क्यों घिरता अंधड़ से ...?
नहीं दूर हुई तुमरे सिमरन से ...!!


लीन तुम्हारे प्रेम में प्रभु ...
भय से व्याकुल फिर क्यों होती ...?
painted by:Pragya Singh.
नित  ही  भय  की मन में चलती...
आंधी  से फिर क्यों   घिर  जाती  ...?
 धूल धूसरित क्यों   हो जाती...?
क्यों निर्भीक नहीं हो पाती.....?
एक अजब से डर से डगमग ..
क्योंकर डोले जीवन नैया ...?
अब तो अभय  दान  दो प्रभु .......
राखो लाज हमारी,गिरधारी ...
बेड़ा पार करो खेवैया ....
हे बंसी बजैया ...!!
*कृपया एक नज़र इधर भी डालें...http://swarojsurmandir.blogspot.com/

27 October, 2011

एक मुट्ठी माटी.......!!!!!


  अपने मन...वतन 
और  संस्कारों की
एक मुट्ठी माटी....
हाथ में बटोर कर ...
समेट  कर ...
कर ली बंद मुट्ठी ...

हाथ बंद मुट्ठी ...
पैर जीवन पगडण्डी पर ...
चल रही है अनवरत ..जीवन यात्रा ...
पड़ी कुछ वर्षा की बूँदें.....
मुझ पर ....
भीगी सी माटी....
सोंधी सी खुशबू ...

देखते ही देखते ...
खिल गयी कुछ कोमल कोपलें ...
समेट ली थी माटी ...
अब सहेजना है ...
इन्हीं कोमल कोपलों का जीवन ...!!!!!!!!!!!!


दीपोत्सव  पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें .......
शुभ ज्योति...नवल ज्योति....
ज्यों ...ज्यों ...
बिखेरे अपनी कीर्ति....
 बनी रहे परस्पर सबमे  स्नेह और प्रीती ...!!
इसी भावना से एक क्षमा याचना है कि कुछ दिनों से अपने गायन के सिलसिले में उलझी रही और ब्लोगिंग से दूर रही |अब पुनः अपने देश वापस आने पर कविताओं का सफ़र जारी रहेगा .... अपने विचारों से अवगत कराते   रहिएगा ....वही उर्जा कुछ नया लिखने को प्रेरित करती है ...!!आभार...

29 September, 2011

क्वांर की धूप में .... !!

.
Black buck antelope.
आँगन -आँगन  ....गलियारे ...
मैदान ..मैदान...
कोने-कोने में ...पड़ने लगी है ...
खिलने लगी है धूप  ......
आज फिर आ गया है क्वांर (अश्विन)....!!
तपती क्वांर की   धूप में ....
तप करता है ...
तपता है जैसे मन ...
तपता इस मृग का तन ....
कौन  है  जो  नहीं  तपा .....?
कौन  है जो  बचा  रहा ...?
कभी जब रोकती है.. 
हलकी सी धुप की गर्माहट हमें ...
अलसाई सी इस धूप में ...
जो सो गया वो खो गया ...!!

मौसम  का  क्वांर  तो  आता   है 
 जीवन  में    क्वांर भी  लाता  है....
हमारे जीवन का...?
या इस मृग के जीवन का...?

प्रेरणा पाती हूँ इसकी तपस्या से ...
घंटों धूप में बैठा ....
Basking in the sun.
सहता है धूप की तपिश ....
तप से तप कर ...
जैसे  आग  में  जल  कर..
  कंचन   निखरता है  ...
 निखर  जाता  है मृग  का  तन  भी  ....

धूप में जल-जल कर ....
तप कर ...
तप का उन्माद जब छाया ..
 बन  जाती  है अनमोल  उसकी  काया  ... 
 यही है ..जीवन की..अद्भुत  माया.....!!


According to the Hindu mythology Blackbuck or Krishna Jinka is considered as the vehicle (vahana) of the Moon-god Chandrama.
According to the Garuda Purana of Hindu Mythology, Krishna Jinka bestows prosperity in the areas where they live. The skin of Krishna Mrigam plays an important role in Hinduism, and Brahmin boys are traditionally required to wear a strip of unleathered hide after performing Upanayanam.More importantly...when the antelope sits in the sun for hours together in this season, the skin gets tanned, making it look more beautiful and the colour of the skin becomes more  precious.

Please read this text as just an information to enrich knowledge .
क्वांर से अभिप्राय ...आश्विन मास से है .ये हिंदी महिना सावन ,भादों के बाद क्वांर आता है |इसी क्वांर के महीने में ये हिरन अपने शरीर की काया पलट लेता है ...और फिर उसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं|इसी बात को ध्यान में रखकर ये पोस्ट लिखी है|