नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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03 December, 2012

बेला उषा की आई .....

बेला हेमंत उषा की आई .....!!
पनिहारिन मुस्काई  ...
ओस झरी प्रेम भरी ...
रस गागर भर भर लाई ....!!
चहुँ ओर जागृति छाई ....
बेला उषा की आई ...!!

सर पर गगरी ...
मग चलत ...डग भरत....
मुड़त -मुड़त  हेरत   जात ...
हिया चुराए ...पग डोलत जात ....
वसुंधरा भई नार नवेली ....
 हँसत-मुस्कात ....
राग *'भिन्न षडज' गात  चलत जात  ....
नित प्रात ......रसना ......
प्रेम सागर सों भर-भर गागर ...
कैसी नभ से जग  पर छलकाई ....!!

आनन स्मित आभ सरस छाई .......
......प्रेम धुन धूनी रमाई ...
...बेला उषा की आई ...!!

मोद मुदित जन जन .....
धरा खिली कण कण ....
आस मन जागी ...
ओस से भीगी ....
श्यामा सी छवि सुंदर ....
श्याम मन भाई ...
बेला उषा की आई ....!!!

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भिन्न षडज -हेमंत ऋतु  में गाया जाने वाला राग है ..!!


06 September, 2011

खिल -खिल जाये ..सकल भुवन अपार .....!!

खिल-खिल    जाये ..सकल भुवन अपार .....!!


    इन रंगों को देख कर जब कुछ लिखना चाहा....गहन सोच में डूब  गया मन .....बरबस यही सोचने लगी..इन  रंगों  का  उद्गम  क्या  है  ...?इतने  खूबसूरत  रंग  आये  कहाँ  से  हैं  ...?
  स्वयं से प्रश्न तो स्वयं से ही उत्तर ..
.....अपनी  माँ ..धरा ..जो हमें धारण करती है ...हमारा पालन करती.....ये रंग उसी के तो हैं ...तब 
कुछ इस तरह बह निकले मेरे शब्द...

.





  painting by Pragya Singh.

रंग रेज हो...तुम प्रभु ...
सकल भुवन के ...
साहिब मेरे ....!!
कृपा दृष्टि अबके ऐसी दो...
जीवन में बस ऐसे रंग हों....!
हर्ष हो गीत हो नहीं बैर हो...!!
बहती धारा रंगों के संग ..
भीगा-भीगा हो..निखरा हो..
 सप्त  सुरों का गहरा ये रंग... 
और बिखरा हो खिलाता सा  ..
 सृजित ..जीवित ..प्रस्फुटित .. 
प्रत्येक सृजन ..!!



रंगरेज हो ..तुम प्रभु ..
सकल भुवन के...
साहिब मेरे...
ऐसे कुशल चितेरे ....!!

कीजे  किरपा ..
निजजन पर ..
नीलगगन से नील श्याम रंग ...
 नीलकंठ की जटा  से  ये  गंग .. 
नील धरा की पावस धारा...!!
 धन-धन गाए मन मतवारा ..!!
सिंचित....मेरा-सबका ये मन...
अमृत बरसे घर- घर-आँगन...!

पीत सी प्रीत चटख   खिले  ऐसी ..
 हो जाए ..नव-पल्लवी  सा. ....
निश्छल  कोमल....
खिला-.खिला ..हरित मन..!!

मन में शुभ रंगों की...
ऐसी हो बहार...
बरसे रस   फुहार ...
पृथ्वी  सा  रूप  सँवार...
खिल- खिल  जाये ..सकल भुवन अपार .....!!






संगीत के विषय में जानना चाहें  तो पधारें यहाँ ...मेरा नया ब्लॉग ...
http://swarojsurmandir.blogspot.com/(स्वरोज सुर  मंदिर )

05 July, 2011

स्वप्निल जीवन ......!!

मेरे मीत ....!!
निर्मल मन के-
भावों सी हो.......
अपनी उज्जवल  प्रीत .....
ज्यों थाट बिलावल  सा .....
शुद्ध स्वरों सा-
 मेरा संगीत .....

शुद्ध अनिल सा ..
मलयानिल सा ..
चाहूँ जीवन .... 
नित साधे है तन .....
आतुर ये मन ....
आओ चलें 
उस ओर जहाँ ......
मंद पवन 
अमंद विचार हों ....
स्वप्निल बयार 
की ही बहार हो .....!!
बरसों के
उज्जवल प्रयास से ..
तुम से मुझ से अपने तप से .....
अपने मन मंदिर में ....
मेरे घर आँगन में ....
वृंदा का वन
बन वृन्दावन ..
मन सावन बन ..
बदरा  प्रेम बौछार  ही बरसे ...
तृषा से मन कभी न तरसे ....
आओ चलें उस ओर जहाँ...
श्याम की गैया ...
सोन चिरैया सा ....
स्वप्निल जीवन हो .......!!!!!!!!!!!!