मैं किस बिध तुमको पाऊँ प्रभु..?
अब अखियन नीर बहाऊँ प्रभु ...
पग धरो श्याम मत बेर करो ...
मन मंदरवा सुधि-छाप धरो..
अब अंसुअन पांव पखारूँ प्रभु ...
मैं किस बिध तुमको पाऊँ प्रभु..?
मैं किस बिध तुमको पाऊँ प्रभु..?
मन का इकतारा बाज रहा ..
सुर बिरहा आकुल साज रहा ...
| तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ....! |
मेरे हिरदय मधु प्रीत पली ...
तुम कौन गली ....ऋतु बीत चली ...
निज प्राण पखेरू निकसत हैं ...
मन सुमिरत वंदन गावत है ...
निज प्राण पखेरू निकसत हैं ...
मन सुमिरत वंदन गावत है ...
तरसत मन अब हरि दरसन दो ....
हरो पीर मेरी ...तर जाऊँ प्रभु ...!!
हरो पीर मेरी ...तर जाऊँ प्रभु ...!!
मैं किस बिध तुमको पाऊँ प्रभु..?


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