नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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25 March, 2014

जय भारती के पूत आज !!


असंख्य दिव्य रश्मियाँ
खिली हुई प्रभास सी ,
हैं दिव्य यूं दिशाएँ भी
कि माँ तुम्हें पुकारती ,


फ़लक पे छा रहा है नूर
लक्ष्य भी खिले हुए

उठो सपूत बढ़ चलो
ये  पग हैं क्यों रुके हुए

माँ शारदा का हस्त भी
वृहद है यूं सपूत पर
कि गाओ मन के राग यूं
उदीप्त हों निखर ये स्वर....

खिले हुए कमल सी आज
खिल रही दिशा दिशा,
है ज्योत्सना प्रकाशिनी
सुदीप्त  है प्रखर निशा

के बढ़ चलो तरंग सी
निसर्ग की है रागिनी
के बढ़ चलो उमंग सी
देती है वीणा वादिनी ...!!

प्रबुद्ध मन का मार्ग है ,
खिला हुआ प्रशस्त भी
है सुरभि पुष्प की बही
समीर में उराव भी !!

धरा पे स्वर्ग लाने की
जो हमने तुमने की थी बात
है अब समय रुको नहीं
जय भारती  के पूत आज


है अब समय रुको नहीं
जय भारती  के पूत आज !!

16 July, 2013

माहिया ....

हरियाली छाई है ...
वर्षा की बूँदें ...
कुछ यादें लाई हैं ....



ये चंचल सी बूँदें  ...
मन मेरा भीग रहा  ...
लगी  प्रीत मेरी खिलने ...!!




नहीं   कोई  कहानी है ...
मन मे  बसी मेरे ....
शब्दों की रवानी है ...

तुम  घर अब आ जाओ ...
सांझ घिरी कैसी...
मेरी पीर मिटा जाओ ..!!

ये  मन  भरमाया है ...
मेहँदी  रंग लाई ......
मोरा पिया घर आया है ...!

बूंदन  रस बरस रहा ...
नित नए पात  खिले ....
धरती मन हरस रहा ...!!


झर झर गिरती  बूंदें ...
खनक  रही ऐसे  ....
जैसे   झूम रही बूंदें ...!!

मेरा माहिया आया है ...
लड़ियन बुंदियन का
सेहरा मन भाया  है ...

मेरे कदम क्यूँ बहक रहे ...
वर्षा झूम रही ...
बन मोर हैं थिरक रहे ....!!

धिन धिन तक तक करतीं ...
साज   रही बूंदें ...
धरती पर जब गिरतीं ...!!
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पहली बार महिया लिखने की कोशिश की है ....!!आशा है आप सभी पाठक गण इसे पसंद करेंगे ।

14 March, 2013

अब मन छायो बसंत .......!!!!!!

किसलय अनुभूति देती .....
सागर सी ...
सुनील तरंग ...
सुशील उमंग ..!!!!

रंग भर भर ...  झर-झर निर्झर बहें....!
निसर्ग  झूम झूम गाए...
सुमंगल  स्वस्तिवाचन ....!!!!!


हुआ स्वर्ग सा  विस्तार  नयनाभिराम ...
सुलक्षण सुमन  ..सुविकसित सुवास ....
खिली खिली धरा ...
पा गई  ....सुनिधि सुहास ....!!!!

सुपर्ण सुनियोजित ....
प्रभास अनंत 


अहा ...आयो बसंत ....
मन भायो बसंत ....










अब मन छायो बसंत ...