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07 February, 2012

आया बसंत आया

आया बसंत  मोरी बगिया ...















 फूल ही फूल-
खुशबू ही खुशबू-
बहार ही बहार है--
तन मन प्राण एक हुए-
बूटा बूटा खिल उठा-
मन खिला खिला बौराया...!!
आया बसंत आया-


अमुआ पर बसंत ....










अमुआ की बौराई..
डार -डार...
कोयल की बौराई-
 कुहू  कुहू  ..
सुरभित  समीर के
 आलिंगन से ..
भंवरे की गुंजन से ..
.गुंजित हुआ मन  ..
खिला खिला बौराया ..
आया बसंत आया !!!!!

5 comments:

  1. chhot sa likha hua par
    achchha likha hua

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

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  2. अति सुंदर !!!
    इसको पढ़कर याद आया ....
    ऐसो बसंत नहीं बार बार , फागुन के दिन चार रे
    आपकी आवाज़ में फिर से गूँज उठी...

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