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01 March, 2012

तुम पवन मैं नदिया ...!!!

बहती चलती .बढ़  चली   ... 
जाने   किस ओर .. ?
मन में हिलोर ..
मन के भावों को ..
गुनती...बुनती .. ...तुम संग ..
तुम  पवन मैं नदिया ...!! 

हरियाली बिखेरती ....
छल छल ....कल कल ...
धरा पर अविचल ...
गीत गाती तुम संग ...
चलते हुए ...राह  में ...
दिशा तुम ही  देते हो मुझे ....
तुम पवन मैं नदिया ....


चीर सघन बन ...
मैं बह चलूँ ...
पत्थर तोड़ ...
यूँ राह मोड़ ..
पहाड़ों पर चढ़ूँ ...
फिर झरने सी झरूँ ...
अब वेग तुम  ही दो मुझे ...
तुम पवन मैं नदिया ...!!!

33 comments:

  1. चीर सघन बन ...
    मैं बह चलूँ ...
    पत्थर तोड़ ...
    यूँ राह मोड़ ..
    पहाड़ों पर चढ़ूँ ...
    फिर झरने सी झरूँ ...
    अब वेग दो मुझे ...

    बहुत खूबसूरत भावाव्यक्ति।

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  2. अनुपमा जी, कितना सुंदर चित्र है यह बहती हुई नदी का...काश पवन भी दिख जाता, उतनी ही सुंदर कविता है आपकी...बधाई!

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  3. हरियाली बिखेरती ....
    छल छल ....कल कल ...
    धरा पर अविचल ...
    गीत गाती तुम संग ...
    चलते हुए ...राह में ...
    दिशा तुम ही देते हो मुझे ....
    तुम पवन मैं नदिया ....सुंदर भाव की पंक्तियाँ

    बहुत अच्छी प्रस्तुति,इस सुंदर रचना के लिए बधाई,...

    MY NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...

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  4. कलकल की ध्वनि निःसृत है

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  5. भावों की अभिव्यक्ति ने मोड़ दी धाराएँ है,
    हम संभल भी न पाए की उस वेग ने साथ ले लिया..........

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  6. सुन्दर पोस्ट।

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  7. चीर सघन बन ...
    मैं बह चलूँ ...
    पत्थर तोड़ ...
    यूँ राह मोड़ ..
    पहाड़ों पर चढ़ूँ ...
    फिर झरने सी झरूँ ... बहुत सुंदर नदिया की छल छल सी बहती कविता

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  8. कल कल निश्छल नदी जैसी प्रवाहित काव्य रचना .सुँदर

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  9. साथ सदा को, पहला दूसरे को शीतल करता हुआ तो दूसरा पहले में सिहरन पैदा करता हुआ।

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  10. एक दूजे के पूरक...
    पवन और नदिया...
    सुन्दर...

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  11. एक दार्शनिक अंदाज़ में संबंधों को रेखांकित करती कविता.. सुन्दर!!

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  12. नदी सागर के मुहाने पर..अति उत्तम रचना..

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  13. चीर सघन बन ...
    मैं बह चलूँ ...
    पत्थर तोड़ ...
    यूँ राह मोड़ ..
    पहाड़ों पर चढ़ूँ ...
    फिर झरने सी झरूँ ...
    अब वेग तुम ही दो मुझे ...

    kya baat hai.. bahut hi sundar kavita :)

    palchhin-aditya.blogspot.in

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  14. बहती चलती .बढ़ चली ...
    जाने किस ओर .. ?
    मन में हिलोर ..
    मन के भावों को ..
    गुनती...बुनती .. ...तुम संग ..
    तुम पवन मैं नदिया ...!!वाह! बहुत खुबसूरत एहसास पिरोये है अपने......

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  15. बहुत सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति!

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  16. अनुपमजी क्या बट है बहुत सुन्दर भावमय रचना आभार

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  17. भावपूर्ण रचना, हृदयस्पर्शी शब्द ..........आभार

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  18. रचना का प्रवाह मन मोहक है।

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  19. मर्मस्पशी भाव..... बहुत ही सुंदर

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  20. बहुत सुंदर भाव लिए नदिया के बारे मैं लिखी अनुपम कविता .बहुत बधाई आपको /

    मेरी nai पोस्ट आपकी टिप्पड़ी के इंतज़ार मैं है /जरुर पधारें

    www.prernaargal.blogspot.com
    thanks.

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  21. ठंडी पवन सी ही शीतल और मधुर ये कविता!!

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  22. सुन्दर प्रस्तुति !
    आभार !

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  23. बहुत सुन्दर शब्द चित्र ...

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  24. बहुत सुन्दर...
    आपकी विशुद्ध हिंदी कविता भा गयी मन को...

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  25. पवन का वेग नदिया को दिशा देता है ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति !

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  26. ..........हरियाली बिखेरती ..........
    तुम पवन मैं नदिया ....
    सुंदर प्रस्तुति हेतु आभार ...........

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  27. nadiyon ki kal kal dikh bhi rahi hai, chitra me:)
    bahut khub!

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  28. सुंदर अभिव्यक्ति ,बेहतरीन रचना प्रवाह,..अनुपमा जी पोस्ट पर आइये,...
    ,..
    NEW POST...फिर से आई होली...

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  29. अनुपमा जी होली की शुभकामनायें |

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  30. आभार आप सभी का ...

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  31. बहुत ही सुन्दर मनमोहित करती रचना...
    सुन्दर भाव अभिव्यक्ति :-)
    ****होली की बधाई और ढेर सारी शुभकामनाए ****

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  32. उत्तम रचना...
    सादर..

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