सना नना...
सना नना सायँ सायँ ....
पुरवा करत अठखेली ...
उड़ाए ले रही सर से चूनरी ...!!
चम-चम चमक चमक.....
चमके ......मन कामिनी...
दम-दम दमक दमक ....
दमके दुति दामिनी ....
री सखी ...रूम-झूम ...
लूम-झूम ..झूम-झूम ..
घन घन बरस रही बूंदरी ...!!
मूसलादार पड़ रही वृष्टी...
भीग रही ....तर बतर अतर ... समग्र सृष्टी..
सखियाँ खिल-खिल भींजत जायें....!!
हंस-हंस घूम-घूम फुगड़ी खेलें....
पहने इठलायें...!!
हाय सखी ऐसे मे....
श्याम मोसे रूठ रूठ जाएँ ...!!
अमुवा झूरा ना झुरायें...
सखी कैसे करूँ मनुहार ....??
काह करूँ..कित जाऊँ..??
मन बतियाँ कह नाहिं पाऊँ ....
बोलन बिन चैन नाहिं पाऊँ .......!!
कैसे मनाऊँ ....??
आली ....घन घन घना घन..
श्याम घन बरस रही बूंदरी .....
जियरा मोरा भिगोय रही ...
चंचल श्याम सी ...
मन अभिराम सी ...
हाय री नादान ....
कैसी मचल रही बूंदरी ...!!!!!!



