नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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19 June, 2021

बिन मांगे मोती मिले


बिन मांगे मोती मिले    ,

कविता ऐसे ही मिल जाती है कभी    !
जब मांगती रहती हूँ ईश्वर से ,न कविता आती है ,न भाव !!
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प्रीत के इक पल  को
आँखों में पिरो लो,
मुक्ता सी बनके हृदय  में ,
जा बसें ,
छलके न कोरों से कभी ,

हृदय  में जो
बस चली अनुभूति तो ,
अभिभूत हो लो,
जानने से प्रेम को,
दे सको गर प्रेम ही ,
तो  संजो लो..!!

परखने से ,तौलने से ,
फिर बढ़ाते वर्जना क्यों  ...
मेरे वंदन को समझकर,
जानकर और मानकर भी ,
दूर जाना है  अगर ,
फिर मेरे पथ के वही
अनजान से,
मासूम से राही रहो तुम ...!!!

ये मेरा अनुराग बिसराओ न ,
देखो,
सुनो ,समझो ......!!
क्या कहने  की ये वेदना है , 
संवाद से संवेदना है !
संवेदना मेरी संजो लो ...... !!
तब बांचो अनमोल कथाएं ,
रहने दो …न जानो मुझको ,
बड़ी निर्मूल हैं मेरी व्यथाएं ……!!

अनुपमा त्रिपाठी
 "सुकृति"