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19 June, 2021

बिन मांगे मोती मिले


बिन मांगे मोती मिले    ,

कविता ऐसे ही मिल जाती है कभी    !
जब मांगती रहती हूँ ईश्वर से ,न कविता आती है ,न भाव !!
***************

प्रीत के इक पल  को
आँखों में पिरो लो,
मुक्ता सी बनके हृदय  में ,
जा बसें ,
छलके न कोरों से कभी ,

हृदय  में जो
बस चली अनुभूति तो ,
अभिभूत हो लो,
जानने से प्रेम को,
दे सको गर प्रेम ही ,
तो  संजो लो..!!

परखने से ,तौलने से ,
फिर बढ़ाते वर्जना क्यों  ...
मेरे वंदन को समझकर,
जानकर और मानकर भी ,
दूर जाना है  अगर ,
फिर मेरे पथ के वही
अनजान से,
मासूम से राही रहो तुम ...!!!

ये मेरा अनुराग बिसराओ न ,
देखो,
सुनो ,समझो ......!!
क्या कहने  की ये वेदना है , 
संवाद से संवेदना है !
संवेदना मेरी संजो लो ...... !!
तब बांचो अनमोल कथाएं ,
रहने दो …न जानो मुझको ,
बड़ी निर्मूल हैं मेरी व्यथाएं ……!!

अनुपमा त्रिपाठी
 "सुकृति"

20 comments:

  1. हृदय में जो बस चली अनुभूति तो अभिभूत हो लो,
    जानने से प्रेम को दे सको गर प्रेम ही तो संजो लो।
    लफ़्ज़-दर-लफ़्ज़ आपकी कविता में भरे जज़्बात को समझने की कोशिश कर रहा हूँ। ऐसी बातें सीधे दिल से निकलती हैं और (कम-से-कम कहने वाले के लिए) अनमोल होती हैं।

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  2. रहने दो …न जानो मुझको ,
    बड़ी निर्मूल हैं मेरी व्यथाएं ……!!

    व्यथाओं का मूल ही तो नहीं मिलता है। मिल जायें तो मिट जायें।

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  3. सुंदर भावप्रवण रचना

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  4. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (20-06-2021) को 'भाव पाखी'(चर्चा अंक- 4101) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।

    अनिता सुधीर

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    Replies
    1. आपका सादर धन्यवाद ,अनीता सुधीर जी |

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  5. बहुत ही सुंदर सृजन मन को छूते भाव।
    सादर

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  6. बहुत ही सुंदर

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  7. अत्यंत सुन्दर सृजन ।

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  8. सुंदर भाव ...
    सुंदर रचना ...

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  9. संवाद से संवेदना है !
    संवेदना मेरी संजो लो ...... !!
    तब बांचो अनमोल कथाएं ,
    रहने दो …न जानो मुझको ,
    बड़ी निर्मूल हैं मेरी व्यथाएं ……!

    सुंदर भावाभिव्यक्ति ,सादर नमन

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  10. बहुत सुंदर क्षणिकाएं है गहन भावों को समेटे।
    अभिनव सृजन।

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  11. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  12. आपकी लिखी  रचना  सोमवार 21  जून   2021 को साझा की गई है ,
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।संगीता स्वरूप 

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  13. जानने से प्रेम को,
    दे सको गर प्रेम ही ,
    तो संजो लो..!!
    सुँदर भाव🌹

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  14. बहुत सुन्दर रचना. कई सारे भाव एक साथ मन में छा गए. बधाई.

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  15. ये मेरा अनुराग बिसराओ न ,
    देखो,
    सुनो ,समझो ......!!
    क्या कहने की ये वेदना है ,
    संवाद से संवेदना है !
    संवेदना मेरी संजो लो ...... !!
    तब बांचो अनमोल कथाएं ,
    रहने दो …न जानो मुझको ,
    बड़ी निर्मूल हैं मेरी व्यथाएं ……!!
    ...वाह, सुंदर अहसासों को सुंदर भावों में पिरोती उत्कृष्ट कृति....

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  16. अति सुंदर भावपूर्ण सृजन।

    प्रणाम
    सादर।

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  17. परखने से ,तौलने से ,
    फिर बढ़ाते वर्जना क्यों ...
    मेरे वंदन को समझकर,
    जानकर और मानकर भी ,
    दूर जाना है अगर ,
    फिर मेरे पथ के वही
    अनजान से,
    मासूम से राही रहो तुम ...!!!
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर, भावपूर्ण लाजवाब भावाभिव्यक्ति।

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  18. सुनो ,समझो ......!!
    क्या कहने की ये वेदना है ,
    संवाद से संवेदना है !
    संवेदना मेरी संजो लो ...... !!
    तब बांचो अनमोल कथाएं ,
    रहने दो …न जानो मुझको ,
    बड़ी निर्मूल हैं मेरी व्यथाएं ……!!
    ये प्रेम भी न जाने कैसे कैसे भाव व्यक्त करता है ।
    हर भाव को सुंदरता से गढ़ा है । बहुत सुंदर ।

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