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10 June, 2021

सुखनिता कविता हो ...!!

शीर्ष पर गोल कुमकुमी आह्लाद
प्रातः के नाद की
अलागिनी ,
ऊर्जा में निमृत
सुहासिनी ,
सत्व का अपरिमेय तत्त्व,
खिलता ही जाता
जैसे कोई अस्तित्व ,
तुम इस तरह
मुझ तक आती हुई
मेरी ही एक
सुखनिता कविता हो ...!!

अनुपमा त्रिपाठी
 "सुकृति "



19 comments:

  1. वाह!बहुत सुंदर भावों की अथाह गहराई।
    सादर

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  2. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार( 11-06-2021) को "उजाले के लिए रातों में, नन्हा दीप जलता है।।" (चर्चा अंक- 4092) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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    Replies
    1. आपका सादर धन्यवाद मीना भरद्वाज जी |

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  3. बहुत ही सुन्दर सृजन - - साधुवाद सह।

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  4. अन्तर्मन तक उतरती हुई गहरी अनुभूति दे गई आपकी उत्कृष्ट कृति ।

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  5. आपके शब्द-प्रयोग मेधा को चैतन्य कर जाते हैं।

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  6. सुन्दर रचना

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  7. वाह! शब्दों में दिव्यता को पिरो दिया गया है जैसे

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  8. तुम इस तरह
    मुझ तक आती हुई
    मेरी ही एक
    सुखनिता कविता हो ...!!

    भावों की सुंदर अभिव्यक्ति अनुपमा जी,सादर नमन आपको

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  9. सत्व का अपरिमेय तत्त्व,
    खिलता ही जाता
    जैसे कोई अस्तित्व ---गहनतम लेखन....।

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  10. सत्व का अपरिमेय तत्त्व,
    खिलता ही जाता
    जैसे कोई अस्तित्व
    वाह!!!
    बहुत ही सारगर्भित एवं सार्थक...
    लाजवाब सृजन

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  11. मन को छूती हुई भावपूर्ण रचना

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  12. बेहतरीन लिखती हैं आप। बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया।

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  13. वाह! आलोक सा फैलाया सुंदर सृजन गागर में सागर।
    सुनिता कविता।

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  14. सुहृद पाठकों का सादर धन्यवाद जिन्होंने यहाँ अपने विचार दिए !

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