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22 June, 2021

मेरा मन मेरा पालनहार !!



लिए हुए ,

नयनाभिराम आकृति ,

संजोय हुए

शब्द शब्द  प्रकृति ,

गढ़ते हुए

जीवन के रंगों की झांकी ,

कृशानु (अग्नि ) सादृश्य

ओजपूर्ण सम्पृक्ति

नित्य नवपंथ प्रदर्शक

अनुभूति का प्रतिमान ,

सरसिज के

रूप लावण्य सा द्युतिमान

साथ मेरे सदा सदा अभिनीत  ,

मेरा मन मेरा पालनहार  !!


अनुपमा त्रिपाठी

   "सुकृति "

13 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना, शुभकामनाएँ

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  2. वाह।मन को परिभाषित करती सुंदर कृति,बहुत शुभकामनाएँ।

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  3. सुंदर रचना अनुपमा जी। आपका मन सदा आपका पालनहार रहे, यही शुभकामना है।

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  4. लिए हुए ,

    नयनाभिराम आकृति ,

    संजोय हुए

    शब्द शब्द  प्रकृति ,

    बहुत सुंदर

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  5. बहुत सुन्दर सृजन

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  6. मन ही है सब सृष्टि का आधार...प्रकृति का सौंदर्य बोध भी उन्ही को होता है...मन जिनका पालनहार...बहुत खूब...👏👏👏

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  7. विश्व की आकृति मन में ही तो सिमटी है। सुन्दर कृतज्ञ स्वर।

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  8. बहुत सुंदर सृजन,मन ही देवता मन ही ईश्वर ,सादर नमन आपको

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  9. जिसका मन स्वयं संगी अहि उसको किसी का साथ नहीं चाहिए ...
    आत्म भी तो इश्वर ही है ...

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  10. सुन्दर और सुकोमल रचना, बधाई अनुपमा जी.

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  11. बहुत सुंदर रचना

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  12. प्रकृति में रचा बसा मन । सुंदर अभिव्यक्ति ।

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