नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

19 July, 2011

जीवन नदिया झूम रही है ....!!

बुंदियन बरसे लूँम-झूँम   अब ....
जीवन नदिया पूर 
रहा  है   ..
धारा मन-बन घूम रहा है ...
हृद की ताल-तलैयों में है ...
कल-कल करता निश्छल पानी ..



डम-डम डमरू बोल रहा है ..
मिश्री जैसे घोल रहा है ..




कहीं शब्द की कविता  बनती ..
कभी सुरों की सरिता .. ..
बहता बहता कल-कल करता ...
गुन- गुन सावन गाता ..
 नहीं अमंगल भाता मन को ..                 
शुभ  गुण  मंगल दाता .....!!
...
धारा  जैसा बढ़ता  जीवन ... !!
गीत ख़ुशी के मन में रुनझुन ..
धारा बन-बन घूम रही है .....!!
मन के घुँघरू बजते छुन -छुन ....
मधु रस जब-जब तू  बरसाता....
फिर सब करमों की  है गाथा  .. 
शिव की गौरा ..पारवती तुम ...
श्रेय्मयी माँ  कल्याणी बन ..
संग रहना बन भाग्य विधाता ..!!

जीवन नदिया झूम रही है ..
धारा बन-बन घूम रही है .....!!


इसे भी पढ़ें ..परिकल्पना पर ...

                                             कितने दिनों की प्रतीक्षा बाद ...!! http://www.parikalpnaa.com/2011/07/blog-post_13.html
                  तुम मेरी पहुँच से दूर क्यों हो ..?
http://www.parikalpnaa.com/2011/07/blog-post_20.html

45 comments:

  1. धारा जैसा बढ़ता जीवन ... !!
    गीत ख़ुशी के मन में रुनझुन ..
    मन के घुँघरू बजते छुन -छुन ....
    मधु रस जब-जब तू बरसाता.

    बहुत सुन्दर भाव , सुन्दर प्रस्तुति , बधाई

    ReplyDelete
  2. यही उत्साह निर्झर सा बहता रहे बस।

    ReplyDelete
  3. सुन्दर कविता.... सादर...

    ReplyDelete
  4. सुन्दर प्रवाह भावों का ||
    बधाई ||

    ReplyDelete
  5. जीवन रूपी नदिया सावन में ऐसी ही झूमती है ..सावन में शिव का स्मरण सहज है शायद यह सृजन और संहार दोनों का पर्व है इसलिए .

    ReplyDelete
  6. sunder runjhun chun chun ras barsaati kavita.atisunder.

    ReplyDelete
  7. bahut sunder runjhun karati hui rimjhim phuaron ke saath jeevan main anand barsaati hui pyaari rachanaa.badhaai aapko.

    ReplyDelete
  8. आज 19- 07- 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


    ...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
    ____________________________________

    ReplyDelete
  9. ''जीवन नदिया ''चुनने के लिए ..संगीता जी बहुत बहुत आभार ...

    ReplyDelete
  10. शिव की गौरा ..पारवती तुम ...
    श्रेय्मयी माँ कल्याणी बन ..
    संग रहना बन भाग्य विधाता ..!!
    माँ कल्याणी सदा कल्याण करें !! अति सुन्दर भक्ति भावपूर्ण रचना ..शुभकामनाएं !!!

    ReplyDelete
  11. बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    ReplyDelete
  12. लोक गीत सा आनंद दिया आपकी इस कविता ने...बधाई!!

    ReplyDelete
  13. मन का निरझर झरना यूँ ही बहता रहे ...सुन्दर अभिव्यक्ति..आभार..

    ReplyDelete
  14. सुन्दर भावो की सरिता बह रही है।

    ReplyDelete
  15. कहीं शब्द की कविता बनती ..
    कभी सुरों की सरिता .. ..
    बहता बहता कल-कल करता ...
    गुन- गुन सावन गाता ..
    नहीं अमंगल भाता मन को ..
    शुभ गुण मंगल दाता .....!!

    बहुत सुंदर भावनाएँ ! सदा ही सबका मंगल हो !

    ReplyDelete
  16. कहीं शब्द की कविता बनती ..
    कभी सुरों की सरिता .. ..
    बहता बहता कल-कल करता ...
    गुन- गुन सावन गाता ..
    नहीं अमंगल भाता मन को ..
    शुभ गुण मंगल दाता .....!!

    बहुत सुंदर भाव के साथ लिखी गई रचना।
    आभार

    ReplyDelete
  17. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ सुन्दर रचना लिखा है...सावन सा बहता ....

    ReplyDelete
  18. जीवन नदिया सी
    कल-कल बहती सुमधुर पंक्तियाँ
    सुर और ताल की अनुपम बंदिश में बँधा
    बहुत सुन्दर गीत .... वाह !

    ReplyDelete
  19. गुन- गुन सावन गाता ..
    नहीं अमंगल भाता मन को ..
    शुभ गुण मंगल दाता .....!!

    .........बहुत सुंदर भावनाएँ !

    ReplyDelete
  20. आहा..इस वर्षा गीत से मन मुग्ध हो गया...बधाई स्वीकारें

    नीरज

    ReplyDelete
  21. काफी अच्छी लगी कविता आपकी. आभार.

    ReplyDelete
  22. बेहद उत्कृष्ट रचना है यह. आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  23. पूरी रचना पढ़ दो बार की हिमाचल प्रदेश की यात्रा का स्मरण हो आया वह भी व्यास नदी की कल कल ध्वनि का……अभी पुन: उधर की यात्रा का कार्यक्रम बना है बच्चे के दाखिले के लिये……सुंदर मनभावन रचना……॥

    ReplyDelete
  24. कहीं शब्द की कविता बनती ..
    कभी सुरों की सरिता .. ..
    बहता बहता कल-कल करता ...
    गुन- गुन सावन गाता ..
    नहीं अमंगल भाता मन को ..
    शुभ गुण मंगल दाता ....

    सुन्दर भाव ... सुन्दर शब्द संचयन ... सुन्दर प्रस्तुति ... सरिता की तरह प्रवाहित होता हुवा ...

    ReplyDelete
  25. संगीता जी ..बहुत सुंदर शीर्षक के अंतर्गत आपने मेरी कोई कविता चुनी है ...!कल का इंतज़ार कर रही हूँ ...!!
    बहुत बहुत आभार आपका ...!!

    ReplyDelete
  26. मन के भावों की सुंदर प्रस्तुति अच्छी लगी। कभी-कभी मेरे पोस्ट पर भी आने का कष्ट करें।
    धन्यवाद।

    ReplyDelete
  27. जीवन को इतने खुबसूरत भावो से प्रस्तुत करने के लिए बहुत-बहुत आभार....

    ReplyDelete
  28. अति सुंदर, बहुत बहुत बधाई,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    ReplyDelete
  29. जीवन नदिया झूम रही है ..
    धारा बन-बन घूम रही है .....!!..बहुत सुन्दर भाव , सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  30. जीवन नदिया झूम रही है ..
    धारा बन-बन घूम रही है ...

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  31. सुन्दर एहसास के साथ लाजवाब रचना! हर एक पंक्तियाँ दिल को छू गयी! आपकी लेखनी को सलाम!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    ReplyDelete
  32. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

    ReplyDelete
  33. जीवन नदिया की इस धार को पसंद करने पर आप सभी का आभार ...

    ReplyDelete
  34. जीवन नदिया झूम रही है ..
    धारा बन-बन घूम रही है .....!!
    बहुत अच्छी लगी आपकी ये रचना । शुभकामनाएँ ।

    ReplyDelete
  35. बेहतरीन...सुन्दर!!

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!