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19 August, 2022

अनुरिमा .....!!



बीती विभावरी अरुणिमा
उन्नयन ले आ रही है ,
प्रमुदित नव स्वप्न निज उर
लक्षणा समझा रही है   ....!!

है सुलक्षण रंग मधु  घट
स्वर्णिमा अभिधा समेटे
क्षण विलक्षण अनुरिमा
वसुधा बाग़ महका रही है .....!!

कांतिमय स्थितप्रज्ञ सी
अनुपम सुकेशिनी भामिनि ,
विहग की बोली में जैसे
किंकिणि झनका रही है   ....!!

ऐश्वर्य का अधिभार लेकर  ,
अंजुरी धन धान्य पूरित
आ रही राजेश्वरी
शत उत्स सुख बरसा रही है !!

 वसुधा के कपाल पर
कुमकुमी अभिषेक करती
भोर की आभा में अभिनव
रागिनी मुस्का रही है !!


जीवन है बातों में उसकी ,
शीतलता रातों में है ,
भ्रमर की अनुगूंज
मंगल गीत सुखमय गा रही है   .....!!

दे रहे आशीष कण कण
प्रकृति छाया अनुराग
आ रही सुमंगला
शत उत्स सुख बरसा रही है !!


 अनुपमा त्रिपाठी
  "सुकृति "


17 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(१९-०८ -२०२२ ) को 'वसुधा के कपाल पर'(चर्चा अंक -४५२७) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. सादर धन्यवाद आपका अनीता सैनी जी, मेरी इस प्रविष्टि को चर्चा मंच में स्थान दिया ❤️

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  2. दे रहे आशीष कण कण
    प्रकृति छाया अनुराग
    आ रही सुमंगला
    शत उत्स सुख बरसा रही है !!. भावपूर्ण सुंदर अभिव्यक्ति।

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  3. बहुत ही सुन्दर रचना बधाई

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  4. बहुत बहुत सुंदर रचना

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  5. जीवन है बातों में उसकी ,
    शीतलता रातों में है ,
    भ्रमर की अनुगूंज
    मंगल गीत सुखमय गा रही है ....

    बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण और जीवन का सीख देती अभिव्यक्ति,सादर नमन 🙏

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  6. सुंदर प्रस्तुति

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  7. आपकी लिखी रचना सोमवार 22 अगस्त 2022 को
    पांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    संगीता स्वरूप

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    Replies
    1. सादर धन्यवाद दी मेरी कृति साझा करने हेतु!!

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    2. प्रकृति का मंजुल रूप ,अनुरूप शब्दावली में!

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    3. प्रकृति का मंजुल रूप ,अनुरूप शब्दावली में!

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  8. प्रकृति का अनूठा वर्णन तुम्हारी लेखनी से निकला है ।
    बहुत सुंदर शब्द विन्यास ...... रचना पढ़ते हुए वसुधा धन धान्य से परिपूर्ण लग रही थी ।।

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  9. प्रकृति का मंजुल रूप - अनुरूप शब्दावली में !

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  10. पढ़ते पढ़ते मन शीतल हो गया, सराहनीय सृजन।

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  11. आहा कितनी सुंदर अभिव्यक्ति। पावन.भोर की खुशबू मन में समां गयी। अति मनमोहक शब्दावली से सुसज्जित सुंदर रचना।

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  12. सुन्दरऔर मनमोहक प्रकृति चित्रण प्रिय अनुपमा जी।
    बीती विभावरी जाग री---- का स्मरण हो आया।बधाई और शुभकामनाएं 🙏🌺🌺🌹🌹

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  13. भोर सुहानी आयी! सुंदर चित्रण

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