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02 October, 2022

यूँ ही रहता हूँ !!!

ज़िन्दगी की हसीन पनाहों में यूँ ही फिरता हूँ ,

तेरी तस्वीर को आँखों में लिए फिरता हूँ !!

आवारगी की ये कैसी इन्तेहाँ हो गई 

तेरे संग धूप में छाया में यूँ ही फिरता हूँ 

मेरी मस्ती को मेरी हस्ती की ये कमज़ोरी न समझ 

तू ही तू है तेरी यादों में यूँ ही रहता हूँ !!!


तेरे आने की खबर ले के हवा आती  है 

तेरे रुखसार पे अलकों सी घटा छाती है 

तेरे उस नूर का हर पल मैं यूँ दीदार करूँ 

इसी हसरत में यूँ ही शाम ओ सहर जीता हूँ 

अनुपमा त्रिपाठी 

   ''सुकृति ''

13 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार(०३-१० -२०२२ ) को 'तुम ही मेरी हँसी हो'(चर्चा-अंक-४५७१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. सुंदर व भावपूर्ण सृजन, नीचे कमेंट भाग खुल नहीं रहा है, इसलिए यहीं लिख रही हूँ

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    2. आपका सादर हार्दिक धन्यवाद अनीता जी!!❤️

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  2. उस नूर का इसकदर दीदार कराने के लिए शुक्रिया। उम्दा नज़्म।

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  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार(०३-१० -२०२२ ) को 'तुम ही मेरी हँसी हो'(चर्चा-अंक-४५७१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  4. बहुत ख़ूब ! प्रेम में समर्पण की पराकाष्ठा !

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  5. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 04 अक्तूबर 2022 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. आपका सादर हार्दिक धन्यवाद यशोदा जी!!❤

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  6. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना

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  7. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना

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  8. वाह!खूबसूरत रचना!

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  10. बेहतरीन भावाभिव्यक्ति...👏👏👏

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