नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

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02 October, 2022

यूँ ही रहता हूँ !!!

ज़िन्दगी की हसीन पनाहों में यूँ ही फिरता हूँ ,

तेरी तस्वीर को आँखों में लिए फिरता हूँ !!

आवारगी की ये कैसी इन्तेहाँ हो गई 

तेरे संग धूप में छाया में यूँ ही फिरता हूँ 

मेरी मस्ती को मेरी हस्ती की ये कमज़ोरी न समझ 

तू ही तू है तेरी यादों में यूँ ही रहता हूँ !!!


तेरे आने की खबर ले के हवा आती  है 

तेरे रुखसार पे अलकों सी घटा छाती है 

तेरे उस नूर का हर पल मैं यूँ दीदार करूँ 

इसी हसरत में यूँ ही शाम ओ सहर जीता हूँ 

अनुपमा त्रिपाठी 

   ''सुकृति ''

04 June, 2022

शजर

तेरी फ़िक्र से मुझमे है मेरी सांस का होना '

तुझे तुझसे कहीं  दूर चुरा लाया हूँ मैं 


तेरे चेहरे की हँसी में ही मेरी शाम-ओ -सहर है

सबब -ए -ज़िक्र का पोशीदा असर लाया हूँ मैं


मौसम-ए -गुल की पनाहों में  मैं हूँ ,तेरे ख़त  भी हैं

तेरी यादों से रची शाम संवार लाया हूँ मैं


घने शजर की छाँव में की दो घड़ी  की बात 

दिल अपना तेरे पास यूँ ही छोड़ आया हूँ मैं


अनुपमा त्रिपाठी

"सुकृति "


20 May, 2022

अनहद

दूर से आती हुई आवाज़ भला कैसे सुनूं
मुझे अनहद पे यकीं आज भी बेइंतहा होता है
याद आता है स्पर्श माँ का जब भी
दिल के कोने में फिर इक ख़ाब सा महकता है
रुक रुक के चलते हुए कदमों की तस्लीम थकन
इस भटकन के सिवा  ज़िन्दगी में रक्खा भी क्या है ?
मुझको चाहो या भूलो पर ऐतबार तो करो
अपनी दानिश का वजूद हर सिम्त यूँ कहता क्या है !!


तस्लीम -स्वीकार करना
दानिश -शिक्षा
सिम्त -ओर ,तरफ।
अनुपमा त्रिपाठी 
   सुकृति

13 May, 2022

मन फिर मुस्काता है !!

जब

कभी किसी

उदास शाम की आगोश में

लिपटी मेरी तन्हाई ,

न कहती है ,

न कहने देती है ,

अपनी उदासी का सबब ,

गहराती सुरमई  साँझ

कजरारे नैनो के मानिंद

तब

पलकें उठाती है

और सोये हुए  खाब मेरे

फिर जी उठते हैं ... !!

हवा का इक झोंखा

सहलाकर माथे को

दूर कर देता है

माथे की शिकन

नायाब सा वो खाब

फिर इक बार

जगमगाता है , 

मन फिर मुस्काता है !!

मन फिर मुस्काता है !!

अनुपमा त्रिपाठी

"सुकृति "