''ज़िंदगी एक अर्थहीन यात्रा नहीं है ,बल्कि वो अपनी अस्मिता और अस्तित्व को निरंतर महसूस करते रहने का संकल्प है !एक अपराजेय जिजीविषा है !!''
नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!
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01 December, 2022
19 July, 2021
प्रेम तब भी जीवित होगा
मैं शब्द हूँ
नाद ब्रह्म ...
प्रकृति में रचा बसा ...!!
हूँ तो भाव भी हैं
किन्तु ,
मौन रहूँगा तब भी
भावों का अभाव न होगा !!
प्रतिध्वनित होती रहेगी
गूंज मेरी , अनहद में
उस हद से परे भी
प्रकृति की नाद में ,
जल की कल कल में
वायु के वेग में
अग्नि की लौ में ,
धृति के धैर्य में,रंग में ,बसंत में,
और आकाश के विस्तार में
पहुंचेगी मेरी सदा तुम तक !
प्रभास तब भी जीवित होगा !!
प्रेम तब भी जीवित होगा ...!!!
अनुपमा त्रिपाठी
''सुकृति ''
26 June, 2021
स्मृतियाँ
रात के सन्नाटे में
कभी कभी
खनकती पायल सी
स्मृतियाँ
बोलती हैं ,
खिलती हैं
मनस पटल खोलती हैं !!
झरने लगते हैं ,
यादों से निकलकर
तुम्हारी महक में भीगे शब्द
मेरी कविता तब
ओढ़ लेती है धानी चुनर
खिल खिल
फूलों में कलियों में
खिलखिलाती है
और विविध रंग उतर आते हैं
सावन हुई धरा पर !!
अनुपमा त्रिपाठी
'सुकृति '
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