नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!
नमष्कार..!!!आपका स्वागत है ....!!!

26 August, 2014

हर साल इसी तरह ....!!


बूंद बरसती ,
भर आह्लाद  ,
अमोघ प्रेम मीमांसा बरसाती ,
धरा पर बूंद बूंद
शब्दातीत भावातीत
श्रवणातीत,
(कहने सुनने से परे)
और लहलहा उठता है प्रेम,
सृष्टि की हरीतिमा में
हरित मन की हर्षित प्रतिमा में
मेरे अंगना में
मेरी बगिया मे ,
मेरी हरी चूड़ियों में,
कुछ तुम्हारे शब्दों  में,
बज उठी हो जैसे बूंदों की ताल,
धिनक धिन
किंकिणी झंकार
जीवंत  है प्रेम
पावन सा ...
पावस ऋतु की वर्षा में भीगा ,
हर वर्ष  इसी तरह ....!!


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बारिश का रास्ता देखते देखते अब ब्लॉग पर ही बारिश डाली है .........शायद ईश्वर दिल्ली में कुछ बरसात भेज दें .....!!

22 August, 2014

तपन .....हाइकु ...



तुमरी ठौर....
ढूँढे वही ठिकाना ...
मनवा मेरा ....


तपन बढ़े ...
कैसे दुखवा सहूँ ...
जियरा  जले ...

जलता जल .. .
तपन अविरल  ....
करे श्यामल ....


उड़ता  जल ...
तपिश सूरज की ..
आकुल  मन ...


जल जलता ....
जलती भावनाएं ...
सूखती नदी  ..



चाहे मनवा .....
आस घनेरी जैसी  ...
शीतल छाँव ...


मन बांवरा ....
तपन जले जिया ....
मन सांवरा ...

नीरस मन  ...
जलती भावनाएं ....
दग्ध हृदय  ...


देखो तो कैसी ...
तपती  दुपहरी ....
सूनी हैं  राहें ...........


ए री पवन ...
भर लाई तपन ...
जियरा जले ....



व्याकुल  मन ...
मैं क्या करूँ जतन...
नीर न पाऊं .....!!

धू धू करती ...
तपती दोपहर ..
चलती हवा ...


18 August, 2014

हे कृष्ण कृष्णा.....!!





हे कृष्ण कृष्णा,
नेक सम्हालो  मेरी तृष्णा,
विभूषित प्रमुदित मन करो,
अभिनीत हृदय वीणा को स्वरों  का
अलंकार दो,
संवेदना का जीवन में
संचार दो ,
इक बूंद गिरे
मुझ चातक का,
सोया जीवन
 झंकार दो ....!!



16 August, 2014

जीवन में फिर आस जगाओ .....!!

जल जल के जलता है जल
कैसे बीतेंगे ये पल ,
जल बिन निर्जल नैन  हुए ,
नीरस मन के बैन हुए

मेघ घटा आई घन लाई
उमड़ घुमड़ चहुं दिस अब छाई-
बरसो मेघा मत तरसाओ ,
झर झर बुंदियन रस बरसाओ...!!

बूंदों में सुर-ताल मिलाओ ,
राग मियां मल्हार सुनाओ,
जिया की मोरे प्यास बुझाओ,
जीवन में फिर आस जगाओ ....!!

11 July, 2014

धनक की आस बरसाओ ...!!

धनक की आस बरसाओ ,
मेघा बरसो सरसो
धिनक धिन 
बूंदों का ताल सुनाओ ,
धन धन भाग हमरे हो जाएँ 
धरा पर धान का धन बिखराओ 
आ जाओ जीवन हर्षाओ ....!!
मेरी धरा धारण करे धानी धनक ...!!

बेर भई अब ,
मेघा बरसो सरसो
धनक की आस बरसाओ ...!!

04 July, 2014

बरसो रे मेघा बरसो ....!!


बरसो रे  मेघा बरसो ....

धूप घनी ,
और
पीड़ा घनीभूत  होती है जब  ,
जीवन की

तपती दुपहरी में,
छाया भी श्यामल सी
 कुम्हलाती हुई ,

मन उदास करती है जब ,

अतृप्त प्यास से
तृषित है ....
धरणि  का हृदय जब ....
जल की ही आस
जीवित रखती है
हर सांस
तब,

कोयल की कूक में
हुक सी ......
अंतस  से
उठती है एक आवाज़  ...
बिना साज़....

बरसो रे मेघा बरसो ...!!




30 June, 2014

ओ मासूम ज़िन्दगी। ....!!

समय जब भी असमय
 छीन  लेता  है
कुछ मासूम चेहरों से
मुस्कराहट,
आवृत सा कुछ  होता है,
जो बनता है मौन ताकत   …… !!

धीरे धीरे कड़ी जुड़ती है ,
इस मौन ताकत में ,
प्राची के पट खुलते  ही ,
होने लगता है शोर
 इस ताकत का
तब टूटने लगता है मौन   …
उदासी का ...!

आहत  मन सुनता है
आहट जीवन की  …!!
और चल पड़ती है  ज़िन्दगी फिर......!!

तब सुनाई देती है ,
वही प्रार्थनारत आवाज़ें ,
अगर मेरे शब्दों में ताकत है
अगर मेरी प्रार्थना में बल है
तो दर्द लेकर भी ह्रदय में अपने,
सुनकर मेरे शब्दों की सदा ,
तुम्हें फिर उठना होगा ,
तुम्हें फिर हँसना होगा  …
ओ मासूम ज़िन्दगी। ....!!