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05 September, 2021

धरा पर धारा डोल रही है !!


सागर से मिलने की राहें 

आकुल नद की व्यकुलताएँ 

राह नई नित खोज रही है 

धरा पर धारा डोल रही है 


वर्षा की रिमझिम बूंदों में 

उमड़ घुमड़ घन की रुनझुन में 

कजरी के बोलों में जैसे 

सजनी जियरा खोल  रही है 


धरा पर धारा डोल रही है 


बादल बरस रहा है अंगना 

सजनी का जब खनके कंगना 

हरियाली में प्रीत सुहानी 

जीवन नव रस घोल रही है 


धरा पर धारा डोल रही है !!


अनुपमा त्रिपाठी 

   "सुकृति "

17 comments:

  1. जल कल कल कर बह जाता है...
    सुन्दर रचना।

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  2. धरा पर धारा कहाँ ये तो सजनी का जिया डोल रहा है ..... बहुत सुन्दर रचना .

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    1. रचना पसंद की,आपके स्नेह की आभारी हूँ !!

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  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (06-09-2021 ) को 'सरकार के कान पर जूँ नहीं रेंगी अब तक' (चर्चा अंक- 4179) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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    Replies
    1. नमस्ते रवींद्र जी ,
      बहुत बहुत धन्यवाद आपका मेरी कृति को चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु !!
      सादर

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  4. प्रकृति का सुंदर श्रिंग़ार करती उत्कृष्ट रचना।

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  5. आपकी लिखी रचना सोमवार. 6 सितंबर 2021 को
    पांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    संगीता स्वरूप

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    Replies
    1. दी नमस्ते ,
      आपका बहुत बहुत धन्यवाद मेरी कृति को आपने इस पटल पर स्थान दिया !!
      सादर

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  6. सुंदर शब्दों से सजी शानदार अभिव्यक्ति

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  7. वाह!बहुत ही सुंदर सृजन।
    सादर

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  8. हरियाली में प्रीत सुहानी

    जीवन नव रस घोल रही है
    प्रकृति को सराहती सुन्दर रचना !

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  9. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर मनभावन सृजन।

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  10. कोमल भावपूर्ण रचना

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  11. अनुपम भावों में डूबना होता है यहाँ । अति सुन्दर सृजन ।

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  12. कजरी के बोलों में जैसे
    सजनी जियरा खोल रही है ।
    वाह! अनुपम सृजन।


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  13. कल कल करता जल महज एक धारा नहीं है ...
    जीवन अमृत है ये प्राकृति की देन है ...
    गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई ...

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