तुम बिन हैं ....
सूनी सूनी सी राहें ...
भीगी निगाहें ...मनः पटल ....
हैं स्मृति की रेखाएं ...
मिट न पाएं....
पलकों मेँ है ......
मोती से अनमोल ...
छुपे रतन ....
गूंजे सदा ही ...
कानो में अनमोल ...
तुम्हारे बोल ...
ढलक जाएँ ...
आंसू रुक न पायें ...
...छलके पीर ...
झरना बहे ... ...
मन बहाए नीर ...
न धरे धीर ....
असह्य पीर ...
निर्झर बहे नीर ...
व्यथा पिघले ...
सजल नेत्र ....
भरी जीवन पीर ....
डबडबाएं........
झरना झरे ....
ज्यों मन व्यथा झरे ...
झर झर सी ...
बंद पलक .....
गहराती है पीड़ा ...
उदास मन ...
मन सागर ....वेदना असीम है ..
सूखे नयन ...
सूरज डूबे ...
ढेरों रश्मियाँ लिए ....
डूबती आशा...
बर्फ सी ठंडी ....
संवेदनाएं हुईं ....
शिथिल मन .....
अथाह पीड़ा ....
बस मौन ही रहूँ ....
किससे कहूँ ....?

सुनो न तुम .....
मेरी मन बतियाँ ...
नैना बरसें ....
तुम्हारे बिन .....
सूने ये रैन दिन ...
नेहा बरसे ..............
मन सिसके .....
जो तुम चले आओ ...
मन बहले ...







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