नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!

नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!
नमष्कार..!!!आपका स्वागत है ....!!!

18 August, 2014

हे कृष्ण कृष्णा.....!!





हे कृष्ण कृष्णा,
नेक सम्हालो  मेरी तृष्णा,
विभूषित प्रमुदित मन करो,
अभिनीत हृदय वीणा को स्वरों  का
अलंकार दो,
संवेदना का जीवन में
संचार दो ,
इक बूंद गिरे
मुझ चातक का,
सोया जीवन
 झंकार दो ....!!



16 August, 2014

जीवन में फिर आस जगाओ .....!!

जल जल के जलता है जल
कैसे बीतेंगे ये पल ,
जल बिन निर्जल नैन  हुए ,
नीरस मन के बैन हुए

मेघ घटा आई घन लाई
उमड़ घुमड़ चहुं दिस अब छाई-
बरसो मेघा मत तरसाओ ,
झर झर बुंदियन रस बरसाओ...!!

बूंदों में सुर-ताल मिलाओ ,
राग मियां मल्हार सुनाओ,
जिया की मोरे प्यास बुझाओ,
जीवन में फिर आस जगाओ ....!!

11 July, 2014

धनक की आस बरसाओ ...!!

धनक की आस बरसाओ ,
मेघा बरसो सरसो
धिनक धिन 
बूंदों का ताल सुनाओ ,
धन धन भाग हमरे हो जाएँ 
धरा पर धान का धन बिखराओ 
आ जाओ जीवन हर्षाओ ....!!
मेरी धरा धारण करे धानी धनक ...!!

बेर भई अब ,
मेघा बरसो सरसो
धनक की आस बरसाओ ...!!

04 July, 2014

बरसो रे मेघा बरसो ....!!


बरसो रे  मेघा बरसो ....

धूप घनी ,
और
पीड़ा घनीभूत  होती है जब  ,
जीवन की

तपती दुपहरी में,
छाया भी श्यामल सी
 कुम्हलाती हुई ,

मन उदास करती है जब ,

अतृप्त प्यास से
तृषित है ....
धरणि  का हृदय जब ....
जल की ही आस
जीवित रखती है
हर सांस
तब,

कोयल की कूक में
हुक सी ......
अंतस  से
उठती है एक आवाज़  ...
बिना साज़....

बरसो रे मेघा बरसो ...!!




30 June, 2014

ओ मासूम ज़िन्दगी। ....!!

समय जब भी असमय
 छीन  लेता  है
कुछ मासूम चेहरों से
मुस्कराहट,
आवृत सा कुछ  होता है,
जो बनता है मौन ताकत   …… !!

धीरे धीरे कड़ी जुड़ती है ,
इस मौन ताकत में ,
प्राची के पट खुलते  ही ,
होने लगता है शोर
 इस ताकत का
तब टूटने लगता है मौन   …
उदासी का ...!

आहत  मन सुनता है
आहट जीवन की  …!!
और चल पड़ती है  ज़िन्दगी फिर......!!

तब सुनाई देती है ,
वही प्रार्थनारत आवाज़ें ,
अगर मेरे शब्दों में ताकत है
अगर मेरी प्रार्थना में बल है
तो दर्द लेकर भी ह्रदय में अपने,
सुनकर मेरे शब्दों की सदा ,
तुम्हें फिर उठना होगा ,
तुम्हें फिर हँसना होगा  …
ओ मासूम ज़िन्दगी। ....!!

30 May, 2014

राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!




Ignite the lamp of my heart ....my soul .....!!O Lord .....don't let my prayers go unheard ....!!just hold me before I fall ......!!

राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!
कोयल की कूक में कामना,
मोरी प्रीत का सेतु प्रार्थना ,
आरत का सेतु अराधना
साधक का सेतु साधना
श्याम  तुम तक पहुँचूं  कैसे  .... ?
मीरा की पीर झरे झरना ,
मन की हूक रचे रचना
राह कठिन ,है बिपिन घना ......!!

05 May, 2014

शाश्वत अस्तित्व जीना है .......!!

धूप और छांव
दो पहलू  जीवन के
 सुख और दुख जैसे
दो पहलू प्रत्येक  मन के,
संपूर्णता या समग्रता हेतु,
कोई मिथ्या बोध नहीं,
कोई अनुमान  भी नहीं ...!!
चिर स्थाई  सद्भावना के लिये
आवश्यम्भावी है ,
अत्यंत धैर्य से सुख को जीना ,
उतनी ही प्रबुद्धता से ,
प्रचुरता से ,
दुख की सतह तक पहुंचना ,
दोनों को जीना ,
दोनों का सत्य जानना,
समझना ...अनुभूत करना ,
और फिर
बिना परखे साथ चलना ,
सत्पथ पर हर पल ,
जैसे वायु  सदा साथ रहती है
पृथ्वी की सतह पर
जीवन देने हेतु ,
नदी की सतह पर
दिशा देने हेतु ,
एक सशक्त शक्ति  लिए,
न दुख में मुख मोड़ना है,
न सुख मे प्रभु भजन  छोड़ना है ,
...बस इसी तरह
साथ चलते हुए ,
आभास से प्रभास तक
प्रत्येक प्रात की  उजास सा
मेरी अनुभूति को
प्रकृति के प्रेम की तरह ,
अपना  शाश्वत अस्तित्व जीना  है .......!!