''ज़िंदगी एक अर्थहीन यात्रा नहीं है ,बल्कि वो अपनी अस्मिता और अस्तित्व को निरंतर महसूस करते रहने का संकल्प है !एक अपराजेय जिजीविषा है !!''
नमष्कार !!आपका स्वागत है ....!!!
नमष्कार..!!!आपका स्वागत है ....!!!
28 February, 2015
23 February, 2015
मान्यताएँ ....(क्षणिकाएं)
मेरी मान्यताओं के धागेबंधे हैं उससे ,
समय के साथ ,
समय की क्षणभंगुरता जानते हुए भी,
वृक्ष नहीं हिलता
अपने स्थान से ,
बल्कि जड़ें निरंतर
माटी में और सशक्त
और गहरी पैठती चली जाती हैं !!
आस्था गहराती है ,
छाया और घनी होती जाती है !!
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सदियों से ...
चूड़ी बिछिया पायल पहना ,
बेड़ियों मे जकड़ा ,
अपनों का भार वहन करता
ये कैसा संकोच है ,
निडर ...स्थिर,एकाग्र चित्त ...!!
अम्मा के सर के पल्ले की तरह ........
सरकता नहीं अपनी जगह से कभी ....!!
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बहती धारा से ,
सजल सुबोधितउम्मीद भरे शब्द
शक्तिशाली होते हैं
प्रभावशाली प्रवाहशाली होते हैं
स्वत्व की चेतना जगा ,
जुडते हैं नदी के प्रवाह से इस तरह
के बहती जाती है नदी
कल कल निनाद के साथ
फिर रुकना नहीं जानती ........!!
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25 January, 2015
प्रेम तब भी जीवित होगा...!!
प्रकृति में रचा बसा ...!!
हूँ तो भाव भी हैं
किन्तु ,
न रहूँगा तब भी
भावों का अभाव न होगा !!
प्रतिध्वनित होती रहेगी
गूंज मौन की ,
उस हद से परे भी
प्रकृति की नाद में ,
जल की कल कल में
वायु के वेग में
अग्नि की लौ में ,
आकाश के विस्तार में,
धृति के धैर्य में,
रंग में ,बसंत में,
पहुंचेगी मेरी सदा तुम तक
प्रभास तब भी जीवित होगा
प्रेम तब भी जीवित होगा...!!
31 December, 2014
चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!
शब्द अपने कितने स्वरूपों में
खटखटाते हैं
मन चेतन द्वार ,
लिए निष्ठा अपार ,
झीरी से फिर चली आती है
धरा के प्राचीर पर
रक्तिम .....
पलाश वन सी ....
रक्तिम .....
पलाश वन सी ....
रश्मि की कतार
नवल वर्ष प्रबल विश्वास
सजग है मन
रचने नैसर्गिक उल्लास,
हँसते मुसकुराते से
भीति चित्र ,
प्रभात का स्वर्णिम उत्कर्ष,
शबनमी वर्णिका का स्पर्श ,
एक विस्तृत आकाश का विस्तार ,
बाहें पसार ...
चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!
नवल वर्ष प्रबल विश्वास
सजग है मनरचने नैसर्गिक उल्लास,
हँसते मुसकुराते से
भीति चित्र ,
प्रभात का स्वर्णिम उत्कर्ष,
शबनमी वर्णिका का स्पर्श ,
एक विस्तृत आकाश का विस्तार ,
बाहें पसार ...
चल मन उड़ चल पंख पसार ....!!
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आप सभी को नव वर्ष 2015 की अनेक अनेक मंगलकामनाएं !!सभी के लिए यह वर्ष शुभ हो ऐसी प्रभु से प्रार्थना है !!
आप सभी को नव वर्ष 2015 की अनेक अनेक मंगलकामनाएं !!सभी के लिए यह वर्ष शुभ हो ऐसी प्रभु से प्रार्थना है !!
20 November, 2014
सुरलहरी ...
शीत का पुनरावर्तन ,
जागृति प्रदायिनी ,
उमगी सुनहली प्रात,.....!!
अलसाई सी ,गुनगुनी धूप ,
गुनगुनाती हुई स्वर लहरियाँ,
शब्दों की धारा सी ...
शांत बहती नदी ...
और ...
हृदय में अंबर का विस्तार ,
मेरे मन के दोनों किनारों को जोड़ता
एक सशक्त पुल .....
नयनाभिराम सौन्दर्य देते पल...!!
और कुछ शब्दों की माला पिरोता....
गाता मेरा मन ...
आओ री आओ री आली
गूँध गूँध लाओ री ,
फूलन के हरवा ....!!''
जागृति प्रदायिनी ,
उमगी सुनहली प्रात,.....!!
अलसाई सी ,गुनगुनी धूप ,
गुनगुनाती हुई स्वर लहरियाँ,
शब्दों की धारा सी ...
शांत बहती नदी ...
और ...
हृदय में अंबर का विस्तार ,
मेरे मन के दोनों किनारों को जोड़ता
एक सशक्त पुल .....
नयनाभिराम सौन्दर्य देते पल...!!
और कुछ शब्दों की माला पिरोता....
गाता मेरा मन ...
आओ री आओ री आली
गूँध गूँध लाओ री ,
फूलन के हरवा ....!!''
10 October, 2014
03 October, 2014
प्रगाढ़ हरित अवलंब की छत्र छाया में......
इस विराट वटवृक्ष के ....प्रगाढ़ हरित अवलंब की छत्र छाया में
सत्व पूर्ण एक नीरवता है,
अविच्छिन्न .....!!
हथेलियों पर आक्रोश
ग्रहण करती हुई,
ग्रहण करती हुई,
सायास प्रकाश बचाने के प्रयास में
अकंपित अविचलित रहती हूँ मैं
प्रलयकारी इस वेग में भी .......!!
और इस तरह बचा ले जाती हूँ
तूफान के बीच भी
अंजुरी में सँजोयी
वो दिये की लौ
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सभी का जीवन उज्ज्वल प्रकाशमय हो ....विजयदशमी की अनेक शुभकामनायें !!
अंजुरी में सँजोयी
वो दिये की लौ
जो अंततः
उज्ज्वल कर देती है
हमारा जीवन .......!!
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सभी का जीवन उज्ज्वल प्रकाशमय हो ....विजयदशमी की अनेक शुभकामनायें !!
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